कर्मो का फल रिश्ते क्यों और कैसे बनते हैं।
कर्मो का लेखा - जोखा आपके घर कौन आता है ? बेटा बनकर, बेटी बनकर, दामाद बनकर, और बहु बनकर। जिसका तुम्हारे साथ कर्मों का लेना-देना होता है। लेना देना नहीं होगा तो कोई नहीं आयेगा। एक फौजी था। उसके मां नहीं बाप नहीं थे। शादी नहीं की, बच्चे नहीं, भाई नहीं, बहन नहीं, अकेला ही कमा-कमा के फौज में जमा करता जा रहा था। थोड़े दिन में एक सेठ जी जो फौज में माल सप्लाई करते थे उनसे उनका परिचय हो गया और दोस्ती हो गई । सेठ जी ने कहा जो तुम्हारे पास पैसा है वो उतने के उतने ही पड़ा हैं। तुम मुझे दे दो मैं कारोबार में लगा दूं तो पैसे से पैसा बढ़ जायेगा इसलिए तुम मुझे दे दो। फौजी ने सेठ जी को पैसा दे दिया। सेठ जी ने कारोबार में लगा दिया। कारोबार उनका चमक गया, खूब कमाई होने लगी कारोबार बढ़ गया। थोड़े ही दिन में लड़ाई छिड़ गई। लड़ाई में फौजी घोड़ी पर चढ़कर लड़ने गया। घोड़ी इतनी बदतमीज थी कि जितनी ज़ोर- ज़ोर से लगाम खींचे उतनी ही तेज़ भागे। खीेंचते-खींचते उसके गल्फर तक कट गये लेकिन वो दौड़कर दुश्मनों के गोल घेरे में जाकर खड़ी हो गई। दुश्मनों ने एक ही वार किया और फौजी मर गया, घोड़ी भी मर गई। अब सेठ जी को मालूम हुआ कि फौजी...