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क्या आप जानते हैं, नाखून किस दिन काटना शुभ है??

ये है नाखून काटने का सबसे शुभ दिन, अचानक मिलता है खूब सारा पैसा अक्‍सर बड़े-बुजुर्गों को यह कहते हुए सुना होगा कि रात में नाखून मत काटो या इस दिन नाखून मत काटो. बड़े-बुजुर्गों की इस बात के पीछे कई कारण छिपे हुए हैं. इसलिए नाखून काटने को लेकर कुछ नियम बताए गए हैं. धम्र और ज्‍योतिष के अनुसार सूर्यास्‍त के समय और इसके बाद यानी कि रात में कभी भी नाखून नहीं काटने चाहिए, इससे मां लक्ष्‍मी नाराज होती हैं और घर में गरीबी आती है. वहीं सप्‍ताह के सातों दिन में नाखून काटने के भी अलग-अलग असर होते हैं. लिहाजा जान लें कि नाखून काटने के लिए सबसे शुभ दिन कौनसा है. नाखून काटने का दिन सप्‍ताह के अलग-अलग दिन नाखून काटने का हमारे जीवन पर अलग-अलग असर होता है. यहां तक कि हिंदू धर्म के अलावा इस्‍लाम में भी नाखून काटने का शुभ दिन और सुन्‍नत तरीका बताया गया है. आइए जानते हैं किस दिन नाखून काटने पर कैसा असर होता है. सोमवार- सोमवार के दिन नाखून काटना अच्‍छा होता है. ऐसा करने से तमोगुण से मुक्ति मिलती है. सोमवार का संबंध भगवान शिव, चंद्रमा और मन से जोड़ा गया है. मंगलवार- आमतौर पर मंगलवार को नाखून काटने की मनाही क...

पीपल पेड़ के उपयोग

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  💚अकेला ऐसा पौधा जो दिन और रात दोनो समय आक्सीजन देता है 💛पीपल के ताजा 6-7 पत्ते लेकर 400 ग्राम पानी मे डालकर 100 ग्राम रहने तक उबाले,ठंडा होने पर पिए ब्रर्तन स्टील और एल्युमिनियम का नहीं हो, आपका ह्रदय एक ही दिन में ठीक होना शुरू हो जाएगा 💛पीपल के पत्तो पर भोजन करे, लीवर ठीक हो जाता है 💛पीपल के सूखे पत्तों का पाउडर बनाकर आधा चम्मच गुड़ में मिलाकर सुबह दोपहर शाम खायेँ, किंतना भी पुराना दमा ठीक कर देता है 💛पीपल के ताजा 4-5 पत्ते लेकर पीसकर पानी मे मिलाकर पिलाये,1- 2 बार मे ही पीलिया में आराम देना शुरू कर देता है 💛पीपल की छाल को गंगाजल में घिसकर घाव में लगाये तुरंत आराम देता है 💛पीपल की छाल को खांड (चीनी )मिलाकर दिन में 5-6 बार चूसे, कोई भी नशा छूट जाता है 💛पीपल के पत्तों का काढ़ा पिये, फेफड़ो, दिल ,अमाशय और लीवर के सभी रोग ठीक कर देता है 💛पीपल के पत्तों का काढ़ा बनाकर पिये, किडनी के रोग ठीक कर देता है व पथरी को तोड़कर बाहर करता है 💛किंतना भी डिप्रेशन हो, पीपल के पेड़ के नीचे जाकर रोज 30 मिनट बैठिए डिप्रेशन खत्म कर देता है 💛पीपल की फल और ताजा कोपले लेकर बराबर मात्रा में लेकर पीस...

चिरचिटा, अपामार्ग, लटजीरा का आयुर्वेदिक प्रयोग

अपामार्ग, जिसे सामान्य बोलचाल में लटजीरा या चिरचिटा भी कहा जाता है, आयुर्वेद की एक अत्यंत गुणकारी और दिव्य औषधि है। इसके पत्ते एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-इंफ्लेमेटरी और दर्द निवारक गुणों से भरपूर होते हैं, जिनका उपयोग कई प्रकार की शारीरिक समस्याओं के उपचार में किया जाता है। *अपामार्ग के पत्तों के प्रमुख फायदे  * **दांत और मसूड़ों के दर्द में राहत अपामार्ग के पत्तों का रस दांत दर्द और मसूड़ों की सूजन को दूर करने में बेहद कारगर है। पत्तों को पानी में उबालकर कुल्ला करने से पायरिया, मुंह की बदबू और मसूड़ों से खून आने की समस्या में तुरंत आराम मिलता है।  * **घाव और चोट भरने में असरदार इन पत्तों में प्राकृतिक एंटीसेप्टिक गुण होते हैं। ताजे पत्तों को पीसकर पेस्ट बनाकर कटे हुए स्थान या घाव पर लगाने से खून बहना बंद होता है और संक्रमण का खतरा खत्म होकर घाव तेजी से भरता है।  * **कीड़े के काटने और विषैले डंक पर मधुमक्खी, ततैया, बिच्छू या किसी विषैले कीड़े के काटने पर अपामार्ग के पत्तों का लेप लगाने से जलन, सूजन और दर्द तुरंत कम हो जाता है।  * **पाचन तंत्र और बवासीर  में लाभकारी प...

अमलतास का आयुर्वेदिक उपयोग

 अमलतास को आयुर्वेद में 'आरग्वध' कहा जाता है, जिसका अर्थ है 'रोगों को नष्ट करने वाला'। अमलतास की लंबी, बेलनाकार फलियों के भीतर मौजूद काले रंग का गूदा (Pulp) अत्यंत गुणकारी और कई बीमारियों की प्राकृतिक दवा माना जाता है। अमलतास की फली के प्रमुख औषधीय लाभ कब्ज और बवासीर में अचूक: अमलतास की फली का गूदा प्राकृतिक और सुरक्षित मृदु विरेचक है। यह आंतों को नुकसान पहुंचाए बिना मल को ढीला कर बाहर निकालता है। पुरानी कब्ज, आंतों की सुस्ती और बवासीर में इसका नियमित सेवन पेट को पूरी तरह साफ करता है। रक्त शोधक और त्वचा रोग: इसके शीतल और डिटॉक्सिफाइंग गुण खून को साफ करते हैं। फोड़े-फुंसी, मुंहासे, एक्जिमा, दाद और खुजली जैसी रक्त विकार से जुड़ी समस्याओं में इसका सेवन और बाहरी लेप दोनों लाभकारी हैं। पाचन तंत्र का संतुलन: यह जठराग्नि को संतुलित कर अपच, गैस, एसिडिटी और पेट फूलने की समस्या को दूर करता है। यह आंतों में जमे विषैले तत्वों को बाहर निकालकर चयापचय को दुरुस्त रखता है। गठिया और सूजन में राहत: अमलतास में सूजन-रोधी गुण पाए जाते हैं। यह वात दोष को शांत करके जोड़ों के दर्द, सूजन, गाउट (...

Varahikand वाराही कन्द

 जंगली #वाराहीकन्द डायोस्कोरिया बल्बिफेरा (Dioscorea bulbifera)एयर पोटैटो कहा जाता है 80 वर्ष के उम्र में भी 20 वर्ष की #नौजवानी भर देता है अद्भुत शक्ति वर्धक प्रयोग  #viralreels इसको जंगली वराह (#जंगली सुअर) ज्यादा खाते हैं इसलिए इसे वाराही कंद कहते हैं इसे खाकर के जंगली वराह सिंह से भी लड़ जाता है डरता नहीं है यह अदभुत औषधि है  संस्कृत नाम: वाराही कन्द (Varahi Kand), वायु कन्द, शौकरी।हिंदी नाम: गेँठी (Gethi), हवाई आलू, सुरालू, ज़मी कांडा, आकाश कन्द।अंग्रेजी नाम: Air Potato, आयुर्वेदिक गुण (Properties)रस (स्वाद): तिक्त (कड़वा) और कटु (चरपरा)।वीर्य (प्रभाव): उष्ण (गर्म प्रकृति)।विपाक (पाचन के बाद का प्रभाव): कटु। प्रभाव: यह आयुर्वेद में एक प्रसिद्ध 'रसायन' (Rejuvenator) जड़ी-बूटी मानी जाती है, जो शरीर को बल प्रदान करती है और #बुढ़ापे के लक्षणों को दूर रखती है।  #शारीरिक शक्ति और कायाकल्प: वाराहीकंद का उपयोग कमजोरी दूर करने, वजन बढ़ाने और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को बढ़ाने के लिए ऊर्जावर्धक के रूप में किया जाता है त्वचा रोग और घाव (नासूर): इसके कंद के ...

प्लाट Property खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ?

प्लॉट खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? Answer: प्लॉट खरीदना बड़ा निवेश होता है, इसलिए केवल कम कीमत देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। सबसे पहले जमीन के कागजात, मालिकाना हक, सरकारी रिकॉर्ड, approved layout, road access और संबंधित approvals की जांच करनी चाहिए। जमीन पर किसी प्रकार का विवाद या ऋण तो नहीं है, यह भी जांचना जरूरी है। आसपास की development, सड़क, पानी, बिजली और भविष्य की connectivity और  Development Growth भी देखनी चाहिए। अंतिम निर्णय लेने से पहले योग्य property lawyer और संबंधित सरकारी रिकॉर्ड से दस्तावेजों की पुष्टि कर लेना समझदारी है। HARISH CHANDRA RAJPUT  (Sales Director) DTHT Buildcon pvtltd Super Corridor Indore mp 8109532175

लहसुवा, कोंधरा का आयुर्वेदिक प्रयोग जानिए

 हड्डियों की कमजोरी न्यूरो-डीजनरेटिव रोग असमय झड़ते सफेद होते बाल , खून की कमी , सांस फूलना तथा कमजोर दृष्टि के लिए महा औषधि है कौंधरा  कौंधरा यानि डिगेरा म्यूरीकाटा अमरैंथेस  परिवार से संबंधित फूल वाले पौधे की एक ही प्रजाति है। यह डिगेरा प्रजाति की एकमात्र प्रजाति है जिसमें चौलाई वाले सभी गुणों के साथ अनेक औषधीय तत्व फाइटोकेमिकल्स एंटीऑक्सिडेंट मिनरल्स आयरन विटामिन्स तथा फ्लेवोनोइड्स, एल्कलॉइड्स, टेरपेनोइड्स, सैपोनिन्स, कौमारिन्स, टैनिन्स, कार्डियक ग्लाइकोसाइड्स और एंथ्राक्विनोन्स पाये जाते हैं जो इसे एक अचूक औषधि बनाते हैं  यह  एक लोकप्रिय पत्तेदार सब्जी है जो पालक की तरह पकाई जाती है। यह एक वार्षिक जड़ी बूटी है जो 60-80 सेंटीमीटर तक बढ़ सकती है, और इसका तना सीधा और हल्का हरा होता है। पत्तियों का आकार अंडाकार आगे से नुकीले होते हैं और फूल बीज सफेद गुलाबी रंग के होते हैं  कौंधरा हरी पत्तेदार सब्जी है, जो कई तरह के पोषक तत्वों से भरपूर होती है। इसमें विटामिन ए, सी, के, बी, और ई, साथ ही आयरन, कैल्शियम, फास्फोरस, मैग्नीशियम, और जिंक जैसे खनिज प्रचुर मात्रा मे...