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Showing posts from June, 2026

सहनशील कैसे बनें और सहनशील बनने के फायदे।

 सहनशीलता के सूत्र | शिव बाबा के ज्ञान पर आधारित प्रेरणादायक लेख ॐ शान्ति शिव बाबा परमपिता परमात्मा का ज्ञान सहनशीलता क्या है? सहनशीलता केवल दुःख सहने का नाम नहीं है, बल्कि हर परिस्थिति में मन की शान्ति, धैर्य, प्रेम और क्षमा बनाए रखने की श्रेष्ठ शक्ति है। जब मनुष्य सहनशील बनता है, तब वह परिस्थितियों का दास नहीं, बल्कि उनका विजेता बन जाता है। सहनशीलता के 8 श्रेष्ठ सूत्र @ 1) रहमभाव :-  परमपिता परमात्मा शिव बाबा की तरह, यदि हम रहम भाव से भरपूर होंगे तो हर आत्मा की गलतियों पर भी रहम भाव रहेगा और सहनशील बनेंगे। 2) मातृवत स्नेह :- अपने को जगत अम्बा समझें और स्नेह का सागर बनकर रहें। सोचें, माँ अनेक गलतियां करने पर भी अपने बच्चे के प्रति शुभ भावना, शुभकामना रखती है, क्या ऐसे ही मैं भी हूँ? 3) हिसाब-किताब चुकता :- अनेक आत्माओं से जन्म-जन्मांतर के कर्मों के हिसाब-किताब हैं इसलिए कभी कोई दुःख दे तो दुखी न होकर ऐसा समझें कि हिसाब-किताब चुकता हो रहा है। 4) सहनशाह बनने की तैयारी :- भगवान ने कहा है, यदि सहन करेंगे तो शहंशाह बनेंगे, जितना अधिक सहन करेंगे, उतने बड़े शहंशाह बनेंगे, इसलिए खुश...

आत्म सम्मोहन शक्ति और विधि

Sarvohitaaye vlogs पर आत्म सम्मोहन की शक्ति को जागृत करने के लिए स्टेप बाय स्टेप जानकारी दी गई है। सबसे पहले ध्यान से पढ़ें फिर उपयोग करें और अपने जीवन को स्वस्थ बनायें।  1. पहली स्टेप : ध्यान, प्राणायाम और नेत्र त्राटक द्वारा आत्म सम्मोहन की शक्ति को जगाया जा सकता है। आप पहले प्रतिदिन 5 मिनट का ध्यान करते वक्त अपने भृकुटी (माथे) पर दोनों आंखों के बीच में फोकस करें या आप चाहें तो दीवार पर एक बिंदु बनाकर उसे पाँच मिनट तक देखने के बाद आँखें बंद करके उस बिंदु को देखने का प्रयास करें। कुछ लोग अंगूठे को आँखों की सीध में रखकर तो, कुछ लोग स्पाइरल (सम्मोहन चक्र), कुछ लोग घड़ी के पेंडुलम को हिलते हुए, कुछ लोग लाल बल्ब को एकटक देखते हुए और कुछ लोग मोमबत्ती को एकटक देखते हुए भी उक्त साधना को करते हैं। 2. दूसरी स्टेप : अब शवासन की मुद्रा में लेटकर खुद के शरीर को पूर्णतः ढीला छोड़ दें और सिर्फ स्वांसों के आवागमन पर ही ध्यान दें। 3. तीसरी स्टेप : जब उपरोक्त का अभ्यास हो जाए तब उक्त अवस्था में ही खुद को निर्देश देना प्रारंभ करें। जैसे यदि आपमें आत्मविश्वास की कमी हो तो खुद से कहें कि मुझमें बहुत ...

घुटनों और जोड़ों के दर्द का इलाज

आजकल घूटनों में ग्रीस कम होने कि बिमारी 50+ के नर व नारी को बहुत हो रही है । इसके लिए दो तीन महीने की देशी दवाई जो पंसारी के पास मिल जाती है, इसके लिए- विजयसार कि लकङी 200 ग्राम, लगभग 50 रूपये के आसपास मिल जाऐगी ले आयें । सेवन विधि- पहले लकङी को अच्छे से धोकर धूप मे सुखा लेवें, फिर कूटकर जौ व गेंहू जितने छोटे-छोटे टुकङे कर लेवें। अब दस ग्राम लकङी को कांच मिट्टी या चीनी मिट्टी के एक गिलाश मे पानी भरकर दस ग्राम लकङी को रात को भिगो देवें । सुबह उठकर खाली पेट छानकर पी लेवे, फिर गिलाश पानी से भर देवें, शाम को सोते समय वैसे ही पानी पी लेवें, इस प्रकार तीन दिन एक बार की लकङी रखनी है, तीन दिन बाद लकङी बदल देवें । 15 से 20 दिन बाद घूटनो मे ग्रीस कम होने से होने वाले दर्द मे असर दिखाई देगा । और दूसरा उपाय भी साथ में कर सकते हैं - 200 ग्राम देसी बबूल कि कच्ची फली, छाया मे सुखाई हुई लें । 200 ग्राम मिश्री के साथ पीसकर पाऊडर बना लेवे । एक चम्मच सुबह एक चम्मच शाम को दूध के साथ सेवन करे ।  यह दोनो प्रयोग से 95%  तक घूटनों का दर्द, जिसमें डाक्टर ने ग्रीस कम या घुटनों का घिसना बताया हो ...