दीपज्योति: परब्रह्म: दीपज्योति: जनार्दन:। दीपोहरतिमे पापं संध्यादीपं नमोस्तुते ।। शुभं करोतु कल्याणमारोग्यं सुखं सम्पदां। दुष्ट बुद्धि विनाशाय दीपोज्योति: नमोस्तुते।। प्रिय दोस्तों हम सभी किसी न किसी देव या देवी की पूजा अवश्य करते हैं और उस पूजा मे जाने-अनजाने कुछ गलतियाँ हो जाती हैं और हमे पता ही नही होता...! इसलिए आप सभी पूजा पूर्ण होने पर तुरंत इस नीचे दिए गए क्षमा प्रार्थना मन्त्र को अवश्य पढें... ईश्वर आप सभी का कल्याण करें और सभी आनंदमय और रोगमुक्त जीवन जियें... पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥ मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं जनार्दन यत्पूजितं मया देव! परिपूर्ण तदस्तु मे॥ दीपक लगाने का मंत्र- मंत्र- शुभम करोति कल्याणं, आरोग्यं धन संपदाम्, शत्रु बुद्धि विनाशाय, दीपं ज्योति नमोस्तुते ।। इस मंत्र का सरल अर्थ यह है कि शुभ और कल्याण करने वाली, आरोग्य और धन संपदा देने वाली, शत्रु बुद्धि का विनाश करने वाली दीपक की ज्योति को नमस्कार है। सावधानी- दीपक की लौ पूर्व दिशा या उत्तर दिशा मे ही रखें, क्योंकि दीपक की लौ पूर्व दिशा मे रखने से आयु बढती है और उत्तर दिशा मे रखने से आय-...