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पैसों की बारिश (बरकत) करने वाला पेड।

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इस पौधे को घर पर रखने से होती है पैसों की बरसात, चुंबक की तरह पैसा खींचता है यह पेड। जब बहुत मेहनत करने पर भी सफलता, कामयाबी न मिले तो रास्ता बंद नहीं हो जाता आपके लिए एक जादुई प्लांट पेड है जो आपको अपार सफलताएं, खुशियां देगा सिर्फ एक बार जरूर लगायें ये पेड अपने घर या व्यवसाय स्थान पर। भारतीय वास्तु शास्त्र में वैसे तो पेड़ पौधे का काफी महत्व है लेकिन वास्तुशास्त्र फेंगशुई का भी काफी महत्व होता है। चीनी वास्तु शास्त्र फेंगशुई में भी घर में पैसों और तरक्की पाने के कई उपाय बताए जाते हैं। वैसे तो इस बात को हर कोई जानता है कि मनी प्लांट को घर में लगाना काफी शुभ माना जाता है। आज हम आपको एक ऐसे पौधे के बारे में बताने जा रहे हैं जो सच में पैसे खींचने का ही काम करता है। इसे मोहिनी पौधा भी कहते हैं और इसे लगाने वाले घर में बहुत तेजी से धन और संपत्ति आती है।  इस पौधा को घर मे लगाने से समस्त परिवार मे आपसी मन-मुटाव दूर होता है और प्रेम उत्पन्न होता है जिससे घर मे सुख-शांति बढती है। vastu घर-घर में लग रहा मोहिनी पौधा शहर में अधिकतर लोग धन और संपत्ति की कामना में मोहिनी पौधे को लगा रहे हैं। मान...

रामायण की कुछ विशेष जानकारी

 रामायण में वर्णित मुख्य स्थान :: 1.तमसा नदी : अयोध्या से 20 किमी दूर है तमसा नदी। यहां पर उन्होंने नाव से नदी पार की।   2.श्रृंगवेरपुर तीर्थ : प्रयागराज से 20-22 किलोमीटर दूर वे श्रृंगवेरपुर पहुंचे, जो निषादराज गुह का राज्य था। यहीं पर गंगा के तट पर उन्होंने केवट से गंगा पार करने को कहा था। श्रृंगवेरपुर को वर्तमान में सिंगरौर कहा जाता है।   3.कुरई गांव : सिंगरौर में गंगा पार कर श्रीराम कुरई में रुके थे।   4.प्रयाग: कुरई से आगे चलकर श्रीराम अपने भाई लक्ष्मण और पत्नी सहित प्रयाग पहुंचे थे। कुछ महीने पहले तक प्रयाग को इलाहाबाद कहा जाता था ।   5.चित्रकूट : प्रभु श्रीराम ने प्रयाग संगम के समीप यमुना नदी को पार किया और फिर पहुंच गए चित्रकूट। चित्रकूट वह स्थान है, जहां राम को मनाने के लिए भरत अपनी सेना के साथ पहुंचते हैं। तब जब दशरथ का देहांत हो जाता है। भारत यहां से राम की चरण पादुका ले जाकर उनकी चरण पादुका रखकर राज्य करते हैं।   6.सतना: चित्रकूट के पास ही सतना (मध्यप्रदेश) स्थित अत्रि ऋषि का आश्रम था। हालांकि अनुसूइया पति महर्षि अत्रि चित्रकूट के तपोवन में रहा ...

परमपिता परमातमा को धनयवाद

*ऐ परमात्मा तेरा बहुत शुक्रिया*  मेरे हर पल का "धन्यवाद* हर स्वांस का "धन्यवाद" हाथ थामने का "धन्यवाद" सिर पर हाथ रखने का "धन्यवाद" हर दुख से बचाने का "धन्यवाद" अंग संग रहने का "धन्यवाद" अपना बनाने का "धन्यवाद" मेरे परिवार के सुख चैन के लिए आप का "धन्यवाद" "धन्यवाद" आपके हर रहमों कर्म का.  "धन्यवाद" आपकी छत्र छाया का "धन्यवाद" आपकी शक्तियों और वरदानों का "धन्यवाद" मुझको अपनाने का "धन्यवाद" इस घर की छत में पनाह देने का "धन्यवाद" खानें का, पानी का, हवा का "धन्यवाद" इस संपूर्ण स्वास्थ्य का "धन्यवाद" आपके हाथ और साथ का, आपके सहारे का "धन्यवाद" आपकी सर्व शक्तियों और गुणों की महसुस्ता का   *प्रभु तेरा हर पल शुक्र है। तेरा बहुत बहुत बहुत शुक्रिया* धन्यवाद- धन्यवाद- धन्यवाद      🙏 *ओम शान्ति* 🙏

HAIR PROBLEMS SOLUTION/ बालों की समस्याओं का समाधान

बालों को मजबूत, घना और लंबा बनाने के लिए आंवला लगाया जाता है, लेकिन यह बालों को काला करने में भी अच्छा साबित होता है. हालांकि आपको इसे अकेला ही बालों में नहीं लगाना है बल्कि मेथी के दानों (Fenugreek Seeds) को पीसकर आंवला पाउडर (Amla Powder) के साथ मिलाना है. इसके लिए 3 बड़े चम्मच आंवला के पाउडर को लेकर इसमें बराबर मात्रा में मेथी के दानों का पाउडर मिला लें और नींबू के रस की कुछ मात्रा मिला लेवें और बालों पर एक घंटे लगा रहने देने के बाद धो लें, यह स्कैल्प और बालों की कई दूसरी दिक्कतों को दूर करने में भी अच्छा असर दिखाता है।  विशेष:- उपयोग करने वाले सभी यूजर्स अपना रिजल्ट और अनुभव जरूर कमेन्टस करके बतायें  धन्यवाद...

गंगा मां और गंगाजल की महिमा

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 *गंगा जल* अमेरिका में एक लीटर गंगाजल 250 डालर में क्यों मिलता है ? सर्दी के मौसम में कई बार खांसी हो जाती है। जब डॉक्टर से खांसी ठीक नही हुई तो किसी ने बताया कि डाक्टर से खांसी ठीक नहीं होती तब गंगाजल पिलाना चाहिए। गंगाजल तो मरते हुए व्यक्ति के मुंह में डाला जाता है, हमने तो ऐसा सुना है ; तो डॉक्टर साहिब बोले- नहीं ! कई रोगों का इलाज भी है। दिन में तीन बार दो-दो चम्मच गंगाजल पिया और तीन दिन में खांसी ठीक हो गई। यह अनुभव है, हम इसे गंगाजल का चमत्कार नहीं मानते, उसके औषधीय गुणों का प्रमाण मानते हैं। कई इतिहासकार बताते हैं कि सम्राट अकबर स्वयं तो गंगा जल का सेवन करता ही था, मेहमानों को भी गंगा जल पिलाता था। इतिहासकार लिखते हैं कि अंग्रेज जब कलकत्ता से वापस इंग्लैंड जाते थे, तो पीने के लिए जहाज में गंगा का पानी ले जाते थे, क्योंकि वह सड़ता नहीं था। इसके विपरीत अंग्रेज जो पानी अपने देश से लाते थे वह रास्ते में ही सड़ जाता था। करीब सवा सौ साल पहले आगरा में तैनात ब्रिटिश डाक्टर एमई हॉकिन ने वैज्ञानिक परीक्षण से सिद्ध किया था कि हैजे का बैक्टीरिया गंगा के पानी में डालने पर कुछ ही देर में मर...

पांच बातें ज्ञान की

 *||पाँच बातें||* शिक्षित और युवा व्यक्ति के पास कोई काम का न होना सचमुच दुखद है. हरपाल सिंह के साथ भी कुछ ऐसा ही था.गांव में थोड़ी बहुत जमीन थी पर उससे परिवार का गुजारा होना बड़ा कठिन था.वह अपनी बूढ़ी माँ,पत्नी-बच्चों के लिए आवश्यक वस्तुएँ नहीं जुटा पाता था.इसलिए आज उसने विचार कर लिया था कि वह किसी राजा के पास जाकर कोई चाकरी ही कर लेगा. उसे अपने परिवार से बहुत प्यार था. पर उनकी बेहतरी के लिए अपने मन को कठोर करके आज वह किसी को बिना बताए चांदनी रात में चुपचाप घर से निकल पड़ा.गांव में सन्नाटा पसरा हुआ था.कुछ कुत्तों के भौंकने का स्वर सुनाई दे रहा था. रात के अंधकार में तारे टिमटिमा रहे थे. गांव से थोड़ी ही दूर एक बूढ़ा व्यक्ति अपनी झोपड़ी में रहता था.लोग उसे पागल कहा करते थे.पर वह जब भी कोई बात कहता,ज्ञान की बात ही कहता.हरपाल ने सोचा कि क्यों न उस बूढ़े बाबा से ज्ञान की कुछ बातें सुनता चलूँ.परदेस जा रहा हूं,न जाने कौन सा संकट आन पड़े. सो वह उस बूढ़े की कुटिया में पहुंच गया और अपनी बात कही. बूढ़े ने कहा बेटा परदेस जा रहे हो तो मेरी ये पांच बातें सदैव याद रखना- 1.जो तुम्हारी सेवा करे तु...

महिमा बेल वृक्ष और बेलपत्र की

 बेलपत्र की कहानी :-,🌹🌹🌹🌹🌹🌹 ,,,🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿 स्कंद पुराण के अनुसार, एक बार माता पार्वती के पसीने की बूंद मंदराचल पर्वत पर गिर गई और उससे बेल का पेड़ निकल आया। चुंकि माता पार्वती के पसीने से बेल के पेड़ का उद्भव हुआ। अत: इसमें माता पार्वती के सभी रूप बसते हैं। वे पेड़ की जड़ में गिरिजा के स्वरूप में, इसके तनों में माहेश्वरी के स्वरूप में और शाखाओं में दक्षिणायनी व पत्तियों में पार्वती के रूप में रहती हैं। 🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿 फलों में कात्यायनी स्वरूप व फूलों में गौरी स्वरूप निवास करता है। इस सभी रूपों के अलावा, मां लक्ष्मी का रूप समस्त वृक्ष में निवास करता है। बेलपत्र में माता पार्वती का प्रतिबिंब होने के कारण इसे भगवान शिव पर चढ़ाया जाता है। भगवान शिव पर बेल पत्र चढ़ाने से वे प्रसन्न होते हैं और भक्त की मनोकामना पूर्ण करते हैं। जो व्यक्ति किसी तीर्थस्थान पर नहीं जा सकता है अगर वह श्रावण मास में बिल्व के पेड़ के मूल भाग की पूजा करके उसमें जल अर्पित करे तो उसे सभी तीर्थों के दर्शन का पुण्य मिलता है। 🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿 बेल वृक्ष का महत्व-  1. बिल्व वृक्...