Varahikand वाराही कन्द
जंगली #वाराहीकन्द डायोस्कोरिया बल्बिफेरा (Dioscorea bulbifera)एयर पोटैटो कहा जाता है 80 वर्ष के उम्र में भी 20 वर्ष की #नौजवानी भर देता है अद्भुत शक्ति वर्धक प्रयोग
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इसको जंगली वराह (#जंगली सुअर) ज्यादा खाते हैं इसलिए इसे वाराही कंद कहते हैं इसे खाकर के जंगली वराह सिंह से भी लड़ जाता है डरता नहीं है यह अदभुत औषधि है
संस्कृत नाम: वाराही कन्द (Varahi Kand), वायु कन्द, शौकरी।हिंदी नाम: गेँठी (Gethi), हवाई आलू, सुरालू, ज़मी कांडा, आकाश कन्द।अंग्रेजी नाम: Air Potato, आयुर्वेदिक गुण (Properties)रस (स्वाद): तिक्त (कड़वा) और कटु (चरपरा)।वीर्य (प्रभाव): उष्ण (गर्म प्रकृति)।विपाक (पाचन के बाद का प्रभाव): कटु।
प्रभाव: यह आयुर्वेद में एक प्रसिद्ध 'रसायन' (Rejuvenator) जड़ी-बूटी मानी जाती है, जो शरीर को बल प्रदान करती है और #बुढ़ापे के लक्षणों को दूर रखती है।
#शारीरिक शक्ति और कायाकल्प: वाराहीकंद का उपयोग कमजोरी दूर करने, वजन बढ़ाने और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को बढ़ाने के लिए ऊर्जावर्धक के रूप में किया जाता है
त्वचा रोग और घाव (नासूर): इसके कंद के चूर्ण या लेप का उपयोग #नासूर (पुराने घावों) और त्वचा के संक्रमण को ठीक करने के लिए पारंपरिक रूप से किया जाता है
#बवासीर (Piles) में राहत: आयुर्वेद के अनुसार इसके कंद के चूर्ण को हल्के घी या मिश्री के साथ लेने से बवासीर के लक्षणों में आराम
नोट 👉 के नीचे का कंद बिना शोधन किया नहीं खाना चाहिए
#शोधन विधि👉 वाराहीकंद के जड़ को अच्छी तरह से धोकर टुकड़ा टुकड़ा काट कर दूध में उबाल देना चाहिए उसके बाद निकाल कर
आँवले के रस में डुबो देना चाहिए 2 दिन तक आवले के रस में रखना चाहिए उसके बाद निकाल कर सुखाकर पाउडर बनाकर रख लेना चाहिए
उसके बाद सेवन करें दूध या जल के साथ सेवन करें
खट्टा मसालेदार पदार्थ नहीं खाना चाहिए
Disclaimer:- Sabhi Apni sujh-bujh aur Samajhdari se upyog karen, ye sirf jankari matra hai.
Ayurvedic Jadi Buti
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