कपालभाती प्राणायाम Kapaal Bhaati
कपालभाती प्राणायाम को कपालभाती क्यों कहते हैं और इस प्राणायाम को क्यों करना चाहिए जानिए -
कपालभाति को कपालभाति इसलिए कहते हैं क्योंकि यह संस्कृत के दो शब्दों "कपाल" (मस्तिष्क/खोपड़ी) और "भाति" (चमकना/प्रकाश) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है "खोपड़ी को चमकाने वाली" या "मस्तिष्क को प्रकाशित करने वाली" श्वास तकनीक, जो इस अभ्यास से माथे पर चमक (तेज) और आंतरिक शुद्धि आती है, और यह मस्तिष्क के कार्यप्रणाली को बेहतर बनाती है।
शाब्दिक अर्थ:
कपाल (Kapal): सिर, ललाट या खोपड़ी।
भाति (Bhati): चमकना, प्रकाशित करना, दीप्ति, तेज।
नामकरण का कारण:
मस्तिष्क की शुद्धि: इस क्रिया से मस्तिष्क और उसके नीचे के अंग (जैसे साइनस, नाक मार्ग) शुद्ध होते हैं, जिससे मानसिक स्पष्टता और एकाग्रता बढ़ती है।
चेहरे पर चमक: अभ्यास के बाद माथे पर पसीना आता है और चेहरे पर एक प्राकृतिक चमक (ओज) आती है, जो आंतरिक सफाई का प्रतीक है।
प्राणायाम का राजा: इसे प्राणायामों का राजा भी कहते हैं क्योंकि यह नाभि (मणिपुर चक्र) को सक्रिय करके मस्तिष्क तक ऊर्जा पहुंचाता है और तनाव कम करता है।
संक्षेप में, कपालभाति एक ऐसी क्रिया है जो मस्तिष्क को स्वच्छ कर उसे प्रकाशित करती है, जिससे चेहरे पर तेज और मन में शांति आती है, इसलिए इसे यह नाम दिया गया है।
धन्यवाद
आप स्वस्थ और खुशहाल जीवन जियें
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