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क्या आप जानते हैं, नाखून किस दिन काटना शुभ है??

ये है नाखून काटने का सबसे शुभ दिन, अचानक मिलता है खूब सारा पैसा अक्‍सर बड़े-बुजुर्गों को यह कहते हुए सुना होगा कि रात में नाखून मत काटो या इस दिन नाखून मत काटो. बड़े-बुजुर्गों की इस बात के पीछे कई कारण छिपे हुए हैं. इसलिए नाखून काटने को लेकर कुछ नियम बताए गए हैं. धम्र और ज्‍योतिष के अनुसार सूर्यास्‍त के समय और इसके बाद यानी कि रात में कभी भी नाखून नहीं काटने चाहिए, इससे मां लक्ष्‍मी नाराज होती हैं और घर में गरीबी आती है. वहीं सप्‍ताह के सातों दिन में नाखून काटने के भी अलग-अलग असर होते हैं. लिहाजा जान लें कि नाखून काटने के लिए सबसे शुभ दिन कौनसा है. नाखून काटने का दिन सप्‍ताह के अलग-अलग दिन नाखून काटने का हमारे जीवन पर अलग-अलग असर होता है. यहां तक कि हिंदू धर्म के अलावा इस्‍लाम में भी नाखून काटने का शुभ दिन और सुन्‍नत तरीका बताया गया है. आइए जानते हैं किस दिन नाखून काटने पर कैसा असर होता है. सोमवार- सोमवार के दिन नाखून काटना अच्‍छा होता है. ऐसा करने से तमोगुण से मुक्ति मिलती है. सोमवार का संबंध भगवान शिव, चंद्रमा और मन से जोड़ा गया है. मंगलवार- आमतौर पर मंगलवार को नाखून काटने की मनाही क...

पीपल पेड़ के उपयोग

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  💚अकेला ऐसा पौधा जो दिन और रात दोनो समय आक्सीजन देता है 💛पीपल के ताजा 6-7 पत्ते लेकर 400 ग्राम पानी मे डालकर 100 ग्राम रहने तक उबाले,ठंडा होने पर पिए ब्रर्तन स्टील और एल्युमिनियम का नहीं हो, आपका ह्रदय एक ही दिन में ठीक होना शुरू हो जाएगा 💛पीपल के पत्तो पर भोजन करे, लीवर ठीक हो जाता है 💛पीपल के सूखे पत्तों का पाउडर बनाकर आधा चम्मच गुड़ में मिलाकर सुबह दोपहर शाम खायेँ, किंतना भी पुराना दमा ठीक कर देता है 💛पीपल के ताजा 4-5 पत्ते लेकर पीसकर पानी मे मिलाकर पिलाये,1- 2 बार मे ही पीलिया में आराम देना शुरू कर देता है 💛पीपल की छाल को गंगाजल में घिसकर घाव में लगाये तुरंत आराम देता है 💛पीपल की छाल को खांड (चीनी )मिलाकर दिन में 5-6 बार चूसे, कोई भी नशा छूट जाता है 💛पीपल के पत्तों का काढ़ा पिये, फेफड़ो, दिल ,अमाशय और लीवर के सभी रोग ठीक कर देता है 💛पीपल के पत्तों का काढ़ा बनाकर पिये, किडनी के रोग ठीक कर देता है व पथरी को तोड़कर बाहर करता है 💛किंतना भी डिप्रेशन हो, पीपल के पेड़ के नीचे जाकर रोज 30 मिनट बैठिए डिप्रेशन खत्म कर देता है 💛पीपल की फल और ताजा कोपले लेकर बराबर मात्रा में लेकर पीस...

चिरचिटा, अपामार्ग, लटजीरा का आयुर्वेदिक प्रयोग

अपामार्ग, जिसे सामान्य बोलचाल में लटजीरा या चिरचिटा भी कहा जाता है, आयुर्वेद की एक अत्यंत गुणकारी और दिव्य औषधि है। इसके पत्ते एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-इंफ्लेमेटरी और दर्द निवारक गुणों से भरपूर होते हैं, जिनका उपयोग कई प्रकार की शारीरिक समस्याओं के उपचार में किया जाता है। *अपामार्ग के पत्तों के प्रमुख फायदे  * **दांत और मसूड़ों के दर्द में राहत अपामार्ग के पत्तों का रस दांत दर्द और मसूड़ों की सूजन को दूर करने में बेहद कारगर है। पत्तों को पानी में उबालकर कुल्ला करने से पायरिया, मुंह की बदबू और मसूड़ों से खून आने की समस्या में तुरंत आराम मिलता है।  * **घाव और चोट भरने में असरदार इन पत्तों में प्राकृतिक एंटीसेप्टिक गुण होते हैं। ताजे पत्तों को पीसकर पेस्ट बनाकर कटे हुए स्थान या घाव पर लगाने से खून बहना बंद होता है और संक्रमण का खतरा खत्म होकर घाव तेजी से भरता है।  * **कीड़े के काटने और विषैले डंक पर मधुमक्खी, ततैया, बिच्छू या किसी विषैले कीड़े के काटने पर अपामार्ग के पत्तों का लेप लगाने से जलन, सूजन और दर्द तुरंत कम हो जाता है।  * **पाचन तंत्र और बवासीर  में लाभकारी प...

अमलतास का आयुर्वेदिक उपयोग

 अमलतास को आयुर्वेद में 'आरग्वध' कहा जाता है, जिसका अर्थ है 'रोगों को नष्ट करने वाला'। अमलतास की लंबी, बेलनाकार फलियों के भीतर मौजूद काले रंग का गूदा (Pulp) अत्यंत गुणकारी और कई बीमारियों की प्राकृतिक दवा माना जाता है। अमलतास की फली के प्रमुख औषधीय लाभ कब्ज और बवासीर में अचूक: अमलतास की फली का गूदा प्राकृतिक और सुरक्षित मृदु विरेचक है। यह आंतों को नुकसान पहुंचाए बिना मल को ढीला कर बाहर निकालता है। पुरानी कब्ज, आंतों की सुस्ती और बवासीर में इसका नियमित सेवन पेट को पूरी तरह साफ करता है। रक्त शोधक और त्वचा रोग: इसके शीतल और डिटॉक्सिफाइंग गुण खून को साफ करते हैं। फोड़े-फुंसी, मुंहासे, एक्जिमा, दाद और खुजली जैसी रक्त विकार से जुड़ी समस्याओं में इसका सेवन और बाहरी लेप दोनों लाभकारी हैं। पाचन तंत्र का संतुलन: यह जठराग्नि को संतुलित कर अपच, गैस, एसिडिटी और पेट फूलने की समस्या को दूर करता है। यह आंतों में जमे विषैले तत्वों को बाहर निकालकर चयापचय को दुरुस्त रखता है। गठिया और सूजन में राहत: अमलतास में सूजन-रोधी गुण पाए जाते हैं। यह वात दोष को शांत करके जोड़ों के दर्द, सूजन, गाउट (...

Varahikand वाराही कन्द

 जंगली #वाराहीकन्द डायोस्कोरिया बल्बिफेरा (Dioscorea bulbifera)एयर पोटैटो कहा जाता है 80 वर्ष के उम्र में भी 20 वर्ष की #नौजवानी भर देता है अद्भुत शक्ति वर्धक प्रयोग  #viralreels इसको जंगली वराह (#जंगली सुअर) ज्यादा खाते हैं इसलिए इसे वाराही कंद कहते हैं इसे खाकर के जंगली वराह सिंह से भी लड़ जाता है डरता नहीं है यह अदभुत औषधि है  संस्कृत नाम: वाराही कन्द (Varahi Kand), वायु कन्द, शौकरी।हिंदी नाम: गेँठी (Gethi), हवाई आलू, सुरालू, ज़मी कांडा, आकाश कन्द।अंग्रेजी नाम: Air Potato, आयुर्वेदिक गुण (Properties)रस (स्वाद): तिक्त (कड़वा) और कटु (चरपरा)।वीर्य (प्रभाव): उष्ण (गर्म प्रकृति)।विपाक (पाचन के बाद का प्रभाव): कटु। प्रभाव: यह आयुर्वेद में एक प्रसिद्ध 'रसायन' (Rejuvenator) जड़ी-बूटी मानी जाती है, जो शरीर को बल प्रदान करती है और #बुढ़ापे के लक्षणों को दूर रखती है।  #शारीरिक शक्ति और कायाकल्प: वाराहीकंद का उपयोग कमजोरी दूर करने, वजन बढ़ाने और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को बढ़ाने के लिए ऊर्जावर्धक के रूप में किया जाता है त्वचा रोग और घाव (नासूर): इसके कंद के ...

प्लाट Property खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ?

प्लॉट खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? Answer: प्लॉट खरीदना बड़ा निवेश होता है, इसलिए केवल कम कीमत देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। सबसे पहले जमीन के कागजात, मालिकाना हक, सरकारी रिकॉर्ड, approved layout, road access और संबंधित approvals की जांच करनी चाहिए। जमीन पर किसी प्रकार का विवाद या ऋण तो नहीं है, यह भी जांचना जरूरी है। आसपास की development, सड़क, पानी, बिजली और भविष्य की connectivity और  Development Growth भी देखनी चाहिए। अंतिम निर्णय लेने से पहले योग्य property lawyer और संबंधित सरकारी रिकॉर्ड से दस्तावेजों की पुष्टि कर लेना समझदारी है। HARISH CHANDRA RAJPUT  (Sales Director) DTHT Buildcon pvtltd Super Corridor Indore mp 8109532175

लहसुवा, कोंधरा का आयुर्वेदिक प्रयोग जानिए

 हड्डियों की कमजोरी न्यूरो-डीजनरेटिव रोग असमय झड़ते सफेद होते बाल , खून की कमी , सांस फूलना तथा कमजोर दृष्टि के लिए महा औषधि है कौंधरा  कौंधरा यानि डिगेरा म्यूरीकाटा अमरैंथेस  परिवार से संबंधित फूल वाले पौधे की एक ही प्रजाति है। यह डिगेरा प्रजाति की एकमात्र प्रजाति है जिसमें चौलाई वाले सभी गुणों के साथ अनेक औषधीय तत्व फाइटोकेमिकल्स एंटीऑक्सिडेंट मिनरल्स आयरन विटामिन्स तथा फ्लेवोनोइड्स, एल्कलॉइड्स, टेरपेनोइड्स, सैपोनिन्स, कौमारिन्स, टैनिन्स, कार्डियक ग्लाइकोसाइड्स और एंथ्राक्विनोन्स पाये जाते हैं जो इसे एक अचूक औषधि बनाते हैं  यह  एक लोकप्रिय पत्तेदार सब्जी है जो पालक की तरह पकाई जाती है। यह एक वार्षिक जड़ी बूटी है जो 60-80 सेंटीमीटर तक बढ़ सकती है, और इसका तना सीधा और हल्का हरा होता है। पत्तियों का आकार अंडाकार आगे से नुकीले होते हैं और फूल बीज सफेद गुलाबी रंग के होते हैं  कौंधरा हरी पत्तेदार सब्जी है, जो कई तरह के पोषक तत्वों से भरपूर होती है। इसमें विटामिन ए, सी, के, बी, और ई, साथ ही आयरन, कैल्शियम, फास्फोरस, मैग्नीशियम, और जिंक जैसे खनिज प्रचुर मात्रा मे...

सहनशील कैसे बनें और सहनशील बनने के फायदे।

 सहनशीलता के सूत्र | शिव बाबा के ज्ञान पर आधारित प्रेरणादायक लेख ॐ शान्ति शिव बाबा परमपिता परमात्मा का ज्ञान सहनशीलता क्या है? सहनशीलता केवल दुःख सहने का नाम नहीं है, बल्कि हर परिस्थिति में मन की शान्ति, धैर्य, प्रेम और क्षमा बनाए रखने की श्रेष्ठ शक्ति है। जब मनुष्य सहनशील बनता है, तब वह परिस्थितियों का दास नहीं, बल्कि उनका विजेता बन जाता है। सहनशीलता के 8 श्रेष्ठ सूत्र @ 1) रहमभाव :-  परमपिता परमात्मा शिव बाबा की तरह, यदि हम रहम भाव से भरपूर होंगे तो हर आत्मा की गलतियों पर भी रहम भाव रहेगा और सहनशील बनेंगे। 2) मातृवत स्नेह :- अपने को जगत अम्बा समझें और स्नेह का सागर बनकर रहें। सोचें, माँ अनेक गलतियां करने पर भी अपने बच्चे के प्रति शुभ भावना, शुभकामना रखती है, क्या ऐसे ही मैं भी हूँ? 3) हिसाब-किताब चुकता :- अनेक आत्माओं से जन्म-जन्मांतर के कर्मों के हिसाब-किताब हैं इसलिए कभी कोई दुःख दे तो दुखी न होकर ऐसा समझें कि हिसाब-किताब चुकता हो रहा है। 4) सहनशाह बनने की तैयारी :- भगवान ने कहा है, यदि सहन करेंगे तो शहंशाह बनेंगे, जितना अधिक सहन करेंगे, उतने बड़े शहंशाह बनेंगे, इसलिए खुश...

आत्म सम्मोहन शक्ति और विधि

Sarvohitaaye vlogs पर आत्म सम्मोहन की शक्ति को जागृत करने के लिए स्टेप बाय स्टेप जानकारी दी गई है। सबसे पहले ध्यान से पढ़ें फिर उपयोग करें और अपने जीवन को स्वस्थ बनायें।  1. पहली स्टेप : ध्यान, प्राणायाम और नेत्र त्राटक द्वारा आत्म सम्मोहन की शक्ति को जगाया जा सकता है। आप पहले प्रतिदिन 5 मिनट का ध्यान करते वक्त अपने भृकुटी (माथे) पर दोनों आंखों के बीच में फोकस करें या आप चाहें तो दीवार पर एक बिंदु बनाकर उसे पाँच मिनट तक देखने के बाद आँखें बंद करके उस बिंदु को देखने का प्रयास करें। कुछ लोग अंगूठे को आँखों की सीध में रखकर तो, कुछ लोग स्पाइरल (सम्मोहन चक्र), कुछ लोग घड़ी के पेंडुलम को हिलते हुए, कुछ लोग लाल बल्ब को एकटक देखते हुए और कुछ लोग मोमबत्ती को एकटक देखते हुए भी उक्त साधना को करते हैं। 2. दूसरी स्टेप : अब शवासन की मुद्रा में लेटकर खुद के शरीर को पूर्णतः ढीला छोड़ दें और सिर्फ स्वांसों के आवागमन पर ही ध्यान दें। 3. तीसरी स्टेप : जब उपरोक्त का अभ्यास हो जाए तब उक्त अवस्था में ही खुद को निर्देश देना प्रारंभ करें। जैसे यदि आपमें आत्मविश्वास की कमी हो तो खुद से कहें कि मुझमें बहुत ...

घुटनों और जोड़ों के दर्द का इलाज

आजकल घूटनों में ग्रीस कम होने कि बिमारी 50+ के नर व नारी को बहुत हो रही है । इसके लिए दो तीन महीने की देशी दवाई जो पंसारी के पास मिल जाती है, इसके लिए- विजयसार कि लकङी 200 ग्राम, लगभग 50 रूपये के आसपास मिल जाऐगी ले आयें । सेवन विधि- पहले लकङी को अच्छे से धोकर धूप मे सुखा लेवें, फिर कूटकर जौ व गेंहू जितने छोटे-छोटे टुकङे कर लेवें। अब दस ग्राम लकङी को कांच मिट्टी या चीनी मिट्टी के एक गिलाश मे पानी भरकर दस ग्राम लकङी को रात को भिगो देवें । सुबह उठकर खाली पेट छानकर पी लेवे, फिर गिलाश पानी से भर देवें, शाम को सोते समय वैसे ही पानी पी लेवें, इस प्रकार तीन दिन एक बार की लकङी रखनी है, तीन दिन बाद लकङी बदल देवें । 15 से 20 दिन बाद घूटनो मे ग्रीस कम होने से होने वाले दर्द मे असर दिखाई देगा । और दूसरा उपाय भी साथ में कर सकते हैं - 200 ग्राम देसी बबूल कि कच्ची फली, छाया मे सुखाई हुई लें । 200 ग्राम मिश्री के साथ पीसकर पाऊडर बना लेवे । एक चम्मच सुबह एक चम्मच शाम को दूध के साथ सेवन करे ।  यह दोनो प्रयोग से 95%  तक घूटनों का दर्द, जिसमें डाक्टर ने ग्रीस कम या घुटनों का घिसना बताया हो ...

अति गुणकारी औषधि अतिबला

आइए जानते हैं आज एक अति गुणकारी औषधि अतिबला के बारे में. यह एक महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक औषधीय पौधा है। इसे आयुर्वेद में बलवर्धक और शरीर को पोषण देने वाली जड़ी-बूटी माना जाता है। अतिबला के पत्ते, जड़, बीज और तना सभी औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं। इसमें एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और पौष्टिक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए लाभकारी माने जाते हैं। सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह शरीर की कमजोरी और थकान को दूर करने में मदद करती है। इसे बलवर्धक औषधि माना जाता है, जो शरीर को ऊर्जा और ताकत प्रदान करती है। आयुर्वेद में इसका उपयोग कमजोरी और दुर्बलता दूर करने के लिए किया जाता है। यह जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द में भी लाभकारी मानी जाती है। अतिबला में सूजन-रोधी गुण होते हैं, जो शरीर के दर्द और सूजन को कम करने में मदद करते हैं। इसका तेल या लेप लगाने से आराम मिल सकता है। पाचन तंत्र के लिए भी फायदेमंद है। यह भूख बढ़ाने, अपच और कब्ज जैसी समस्याओं को कम करने में सहायक हो सकती है। यह पाचन क्रिया को संतुलित रखने में मदद करती है। यह इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में भी उपयोगी मानी जाती है। इसमें मौजूद एंटीऑ...

चिरचिटा, अपामार्ग के चमत्कारी उपाय

चिरचिटा इसे लचिचरा और अपामार्ग भी कहते है,,, अपामार्ग से बुद्धि, वाणी और व्यापार वृद्धि का प्राकृतिक उपाय । नमस्ते दोस्तों, आज मैं आपको एक ऐसे अद्भुत पौधे के बारे में बताने जा रहा हूँ जो हमारे आसपास ही रोड के किनारे सभी जगह पाया जाता है, लेकिन इसके गुणों से बहुत कम लोग वाकिफ हैं। यह है चिरचिटा, जिसे अपामार्ग भी कहते हैं। यह कोई साधारण पौधा नहीं है, यह प्रकृति का एक अनमोल उपहार है जो आपकी बुद्धि, वाणी और व्यापार में अद्भुत वृद्धि कर सकता है। यह उपाय रवि पुष्य योग में करना विशेष रूप से फलदायी होता है।  क्या है चिरचिटा ? चिरचिटा एक औषधीय पौधा है जो आमतौर पर खाली जगहों पर, सड़कों के किनारे या बंजर जमीन पर उगता है। इसे संस्कृत में अपामार्ग कहते हैं। आयुर्वेद में इसका बहुत महत्व है। इसकी पत्तियां, बीज और जड़ सभी औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं। आज हम बात करेंगे इसकी जड़ के बारे में। इसकी जड़ में वह शक्ति है जो आपको बुद्धि प्रदान कर सकती है, आपकी वाणी को तेज कर सकती है और आपके व्यापार में वृद्धि कर सकती है। बुद्ध के रत्न पन्ना का विकल्प,,,,, आपने पन्ना रत्न के बारे में सुना होगा जो बुद्धि ...

कोलेजन बूस्टर पाउडर बनाने का तरीका

 झुर्रियों और ढीली स्किन से परेशान ??? घर पर ही बनाएं देसी कोलेजन बूस्टर पाउडर, हफ्ते भर में कांच की तरह चमकेगा चेहरा! बढ़ती उम्र और डल स्किन से छुटकारा पाने के लिए अब महंगे सप्लीमेंट्स की जरूरत नहीं. आपके घर की रसोई में मौजूद कुछ सुपरफूड्स ही ग्लोइंग स्किन देने में मदद करते हैं. आप इन सुपरफूड्स की मदद से घर पर ही 'नेचुरल कोलेजन बूस्टिंग पाउडर' बना सकते हैं. Homemade Collagen Booster Powder:   फिटनेस और स्किन ट्रेंड आजकल सबसे ज्यादा सोशल मीडिया पर देखने को मिल रहे हैं, आज के दौर में हर दूसरा इंसान फिट बॉडी और चमकदार स्किन चाहता है. इसी वजह से सोशल मीडिया पर भी कई तरह की क्रीम और टोनर लोग प्रमोट करते रहते हैं और पार्लर जाकर भी लोग महंगे-महंगे फेशियल करवाते हैं. स्किन पर कुछ भी लगाने से पहले सबसे जरूरी है कि हमें अपनी स्किन के बारे में पता होना चाहिए. अगर आपकी स्किन ड्राई, बेजान और झुर्रियों से भरी है तो इस मतलब साफ है कि आपका कोलेजन लेवल कम है. कोलेजन हमारी बॉडी का जरूर तत्व है, जो कई तरीके से शरीर में काम करता है. त्वचा के लिए भी कोलेजन बहुत अहम रोल निभाता है, क्योंकि इसक...

कलौंजी Kalaunji

 "मौत को छोड कर हर मर्ज की दवाई है कलौंजी" कलयुग में धरती पर संजीवनी है कलौंजी, अनगिनत रोगों को चुटकियों में ठीक करती है।     कैसे करें इसका सेवन? वो इस पोस्ट के अंत में है🙏👇👇 पहले जान ले कि ये किन-किन रोगों में सहायक है? 1/. टाइप-2 डायबिटीज: प्रतिदिन 2 ग्राम कलौंजी के सेवन के परिणामस्वरूप तेज हो रहा ग्लूकोज कम होता है। इंसुलिन रैजिस्टैंस घटती है,बीटा सैल की कार्यप्रणाली में वृद्धि होती है तथा ग्लाइकोसिलेटिड हीमोग्लोबिन में कमी आती है। 2/. मिर्गी: 2007 में हुए एक अध्ययन के अनुसार मिर्गी से पीड़ित बच्चों में कलौंजी के सत्व का सेवन दौरे को कम करता है। 3/. उच्च रक्तचाप: 100 या 200 मि.ग्रा. कलौंजी के सत्व के दिन में दो बार सेवन से हाइपरटैंशन के मरीजों में ब्लड प्रैशर कम होता है। रक्तचाप (ब्लडप्रेशर) में एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में 2 बार पीने से रक्तचाप सामान्य बना रहता है। तथा 28 मि.ली. जैतुन का तेल और एक चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर पूर शरीर पर मालिश आधे घंटे तक धूप में रहने से रक्तचाप में लाभ मिलता है। यह क्रिया हर तीसरे दिन एक महीने तक करना च...

कपालभाती प्राणायाम Kapaal Bhaati

कपालभाती प्राणायाम को कपालभाती क्यों कहते हैं और इस प्राणायाम को क्यों करना चाहिए जानिए - कपालभाति को कपालभाति इसलिए कहते हैं क्योंकि यह संस्कृत के दो शब्दों "कपाल" (मस्तिष्क/खोपड़ी) और "भाति" (चमकना/प्रकाश) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है "खोपड़ी को चमकाने वाली" या "मस्तिष्क को प्रकाशित करने वाली" श्वास तकनीक, जो इस अभ्यास से माथे पर चमक (तेज) और आंतरिक शुद्धि आती है, और यह मस्तिष्क के कार्यप्रणाली को बेहतर बनाती है।  शाब्दिक अर्थ: कपाल (Kapal): सिर, ललाट या खोपड़ी। भाति (Bhati): चमकना, प्रकाशित करना, दीप्ति, तेज।  नामकरण का कारण: मस्तिष्क की शुद्धि: इस क्रिया से मस्तिष्क और उसके नीचे के अंग (जैसे साइनस, नाक मार्ग) शुद्ध होते हैं, जिससे मानसिक स्पष्टता और एकाग्रता बढ़ती है। चेहरे पर चमक: अभ्यास के बाद माथे पर पसीना आता है और चेहरे पर एक प्राकृतिक चमक (ओज) आती है, जो आंतरिक सफाई का प्रतीक है। प्राणायाम का राजा: इसे प्राणायामों का राजा भी कहते हैं क्योंकि यह नाभि (मणिपुर चक्र) को सक्रिय करके मस्तिष्क तक ऊर्जा पहुंचाता है और तनाव कम करता है।  संक्षे...

ATIBALA अतिबला औषधीय गुणों से भरपूर

अतिबला 🌿🌿 (Abutilon indicum) को आयुर्वेद में उसके शक्तिशाली गुणों के कारण "अति बल" (अत्यधिक शक्ति) देने वाली माना गया है। यह वात और पित्त दोष को संतुलित करने में मदद करती है और इसकी तासीर ठंडी होती है। 🌿यहाँ अतिबला🌿 के प्रमुख आयुर्वेदिक लाभ दिए गए हैं: 🌟 शक्ति और जीवन शक्ति वर्धक लाभ..... 👉बल और ओज बढ़ाना: ➡️ इसे पारंपरिक रूप से शरीर की ताकत (बल), सहनशक्ति और समग्र जीवन शक्ति (ओज) को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। 👉यौन स्वास्थ्य (वाजीकरण): ➡️ यह पुरुषों में शुक्राणु💪 की गुणवत्ता और मात्रा (शुक्रधातु) को बेहतर बनाने में मदद करती है, जिससे यौन शक्ति और कामोत्तेजना बढ़ती है। 👉मानसिक स्वास्थ्य: ➡️ यह एक नर्व टॉनिक के रूप में काम करती है और मानसिक तनाव, अनिद्रा और वात-संबंधी तंत्रिका विकारों (जैसे पक्षाघात) में भी लाभकारी मानी जाती है। 🌿🌿 दर्द और सूजन में राहत🌿🌿 👉सूजन रोधी (Anti-inflammatory):➡️ इसके जड़ों और पत्तों में शक्तिशाली सूजन-रोधी गुण होते हैं, जो जोड़ों के दर्द, गठिया (arthritis) और शरीर की सामान्य सूजन को कम करने में सहायक होते हैं। 👉दर्द निवारक (An...

पुनर्नवा कर दे‌ सब नया।

 पुनर्नवा यानी शरीर के अंगों को पुनः नया जीवन देने वाली औषधि,,,,,।। ऑटो इम्यून डिसीज की घातक शत्रु है यह दिव्य औषधि,,,,।  इसके प्रयोग से आज के तनाव भरे जीवन को खुशहाल बनाया जा सकता है। पुनर्नवा, जिसे आयुर्वेद में "पुनर्नवा" कहा जाता है, का अर्थ है "पुनः नया करने वाली"। यह एक अद्भुत औषधीय पौधा है, जो भारत में मुख्य रूप से गीली और नम भूमि में पाया जाता है। पुनर्नवा आयुर्वेद की सबसे भरोसेमंद और कारगर औषधियों में से एक है। इसका प्रयोग मूत्र संबंधी रोगों के उपचार में किया जाता है। खास बात यह है की इसे महिला और पुरुष दोनों ही इस्तेमाल कर सकते हैं।  लोगों में भ्रांति बनी हुई है कि यह केवल महिलाओं के रोगों में ही उपयोगी है। इसके नाम का ही अर्थ होता है rejuvenation यानि कि शरीर को पुनः  नया या जैसा का वैसा कर देने वाली औषधि।  इसे कई सारी बीमारियो एवम रोगों में औषधि की तरह प्रयोग किया जाता है, किन्तु मुख्यतः, धातु रोग, मासिक धर्म के असंतुलन, रक्ताल्पता, कमजोरी तथा शरीर में हार्मोनल imbalance को ठीक करने के लिए यह सबसे भरोसे मंद औषधि है। लिवर और किडनी रोगों के लिये यह सबसे...

अडूसा, वासा, रूस के उपयोग

रूस, अडूसा या वासा के आयुर्वेदिक उपयोग और तरीका जानिए - #आयुर्वेद में अडूसा को आमतौर पर वासा के नाम से जाना जाता है, यह एक लोकप्रिय #औषधीय पौधा है। इस पौधे के सभी भागों (#पत्तियाँ, #फूल, #जड़, #तना, #फल) में औषधीय गुण होते हैं। इसकी एक खास गंध और #कड़वा स्वाद होता है। अडूसा पाउडर को #शहद के साथ सेवन करना  #काली_खांसी, #ब्रोंकाइटिस, #अस्थमा जैसे #श्वसन #संक्रमण के मामलों में फायदेमंद माना जाता है क्योंकि यह अपने #कफ को बाहर निकालने वाले गुण के कारण #वायुमार्ग से #बलगम के स्राव को बढ़ावा देने में मदद करता है। अडूसा (#वासाका) अपने #एंटीऑक्सीडेंट और #एंटी_इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण #गठिया के लक्षणों को प्रबंधित करने में भी मदद कर सकता है। यह गठिया और गाउट से जुड़े #जोड़ों_के_दर्द और #सूजन को कम करता है। यह अपने #एंटीस्पास्मोडिक गुण के कारण ऐंठन को भी कम करता है। अडूसा #त्वचा की समस्याओं के प्रबंधन के लिए एक प्रभावी घरेलू उपाय है। त्वचा पर ताजे अडूसा के पत्तों का #पेस्ट लगाने से इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण के कारण प्रभावित क्षेत्र में #दर्द और #सूजन को कम करके फोड़े और अल्सर को ठीक करने मे...