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कलौंजी Kalaunji

 "मौत को छोड कर हर मर्ज की दवाई है कलौंजी" कलयुग में धरती पर संजीवनी है कलौंजी, अनगिनत रोगों को चुटकियों में ठीक करती है।     कैसे करें इसका सेवन? वो इस पोस्ट के अंत में है🙏👇👇 पहले जान ले कि ये किन-किन रोगों में सहायक है? 1/. टाइप-2 डायबिटीज: प्रतिदिन 2 ग्राम कलौंजी के सेवन के परिणामस्वरूप तेज हो रहा ग्लूकोज कम होता है। इंसुलिन रैजिस्टैंस घटती है,बीटा सैल की कार्यप्रणाली में वृद्धि होती है तथा ग्लाइकोसिलेटिड हीमोग्लोबिन में कमी आती है। 2/. मिर्गी: 2007 में हुए एक अध्ययन के अनुसार मिर्गी से पीड़ित बच्चों में कलौंजी के सत्व का सेवन दौरे को कम करता है। 3/. उच्च रक्तचाप: 100 या 200 मि.ग्रा. कलौंजी के सत्व के दिन में दो बार सेवन से हाइपरटैंशन के मरीजों में ब्लड प्रैशर कम होता है। रक्तचाप (ब्लडप्रेशर) में एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में 2 बार पीने से रक्तचाप सामान्य बना रहता है। तथा 28 मि.ली. जैतुन का तेल और एक चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर पूर शरीर पर मालिश आधे घंटे तक धूप में रहने से रक्तचाप में लाभ मिलता है। यह क्रिया हर तीसरे दिन एक महीने तक करना च...

कपालभाती प्राणायाम Kapaal Bhaati

कपालभाती प्राणायाम को कपालभाती क्यों कहते हैं और इस प्राणायाम को क्यों करना चाहिए जानिए - कपालभाति को कपालभाति इसलिए कहते हैं क्योंकि यह संस्कृत के दो शब्दों "कपाल" (मस्तिष्क/खोपड़ी) और "भाति" (चमकना/प्रकाश) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है "खोपड़ी को चमकाने वाली" या "मस्तिष्क को प्रकाशित करने वाली" श्वास तकनीक, जो इस अभ्यास से माथे पर चमक (तेज) और आंतरिक शुद्धि आती है, और यह मस्तिष्क के कार्यप्रणाली को बेहतर बनाती है।  शाब्दिक अर्थ: कपाल (Kapal): सिर, ललाट या खोपड़ी। भाति (Bhati): चमकना, प्रकाशित करना, दीप्ति, तेज।  नामकरण का कारण: मस्तिष्क की शुद्धि: इस क्रिया से मस्तिष्क और उसके नीचे के अंग (जैसे साइनस, नाक मार्ग) शुद्ध होते हैं, जिससे मानसिक स्पष्टता और एकाग्रता बढ़ती है। चेहरे पर चमक: अभ्यास के बाद माथे पर पसीना आता है और चेहरे पर एक प्राकृतिक चमक (ओज) आती है, जो आंतरिक सफाई का प्रतीक है। प्राणायाम का राजा: इसे प्राणायामों का राजा भी कहते हैं क्योंकि यह नाभि (मणिपुर चक्र) को सक्रिय करके मस्तिष्क तक ऊर्जा पहुंचाता है और तनाव कम करता है।  संक्षे...

ATIBALA अतिबला औषधीय गुणों से भरपूर

अतिबला 🌿🌿 (Abutilon indicum) को आयुर्वेद में उसके शक्तिशाली गुणों के कारण "अति बल" (अत्यधिक शक्ति) देने वाली माना गया है। यह वात और पित्त दोष को संतुलित करने में मदद करती है और इसकी तासीर ठंडी होती है। 🌿यहाँ अतिबला🌿 के प्रमुख आयुर्वेदिक लाभ दिए गए हैं: 🌟 शक्ति और जीवन शक्ति वर्धक लाभ..... 👉बल और ओज बढ़ाना: ➡️ इसे पारंपरिक रूप से शरीर की ताकत (बल), सहनशक्ति और समग्र जीवन शक्ति (ओज) को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। 👉यौन स्वास्थ्य (वाजीकरण): ➡️ यह पुरुषों में शुक्राणु💪 की गुणवत्ता और मात्रा (शुक्रधातु) को बेहतर बनाने में मदद करती है, जिससे यौन शक्ति और कामोत्तेजना बढ़ती है। 👉मानसिक स्वास्थ्य: ➡️ यह एक नर्व टॉनिक के रूप में काम करती है और मानसिक तनाव, अनिद्रा और वात-संबंधी तंत्रिका विकारों (जैसे पक्षाघात) में भी लाभकारी मानी जाती है। 🌿🌿 दर्द और सूजन में राहत🌿🌿 👉सूजन रोधी (Anti-inflammatory):➡️ इसके जड़ों और पत्तों में शक्तिशाली सूजन-रोधी गुण होते हैं, जो जोड़ों के दर्द, गठिया (arthritis) और शरीर की सामान्य सूजन को कम करने में सहायक होते हैं। 👉दर्द निवारक (An...

पुनर्नवा कर दे‌ सब नया।

 पुनर्नवा यानी शरीर के अंगों को पुनः नया जीवन देने वाली औषधि,,,,,।। ऑटो इम्यून डिसीज की घातक शत्रु है यह दिव्य औषधि,,,,।  इसके प्रयोग से आज के तनाव भरे जीवन को खुशहाल बनाया जा सकता है। पुनर्नवा, जिसे आयुर्वेद में "पुनर्नवा" कहा जाता है, का अर्थ है "पुनः नया करने वाली"। यह एक अद्भुत औषधीय पौधा है, जो भारत में मुख्य रूप से गीली और नम भूमि में पाया जाता है। पुनर्नवा आयुर्वेद की सबसे भरोसेमंद और कारगर औषधियों में से एक है। इसका प्रयोग मूत्र संबंधी रोगों के उपचार में किया जाता है। खास बात यह है की इसे महिला और पुरुष दोनों ही इस्तेमाल कर सकते हैं।  लोगों में भ्रांति बनी हुई है कि यह केवल महिलाओं के रोगों में ही उपयोगी है। इसके नाम का ही अर्थ होता है rejuvenation यानि कि शरीर को पुनः  नया या जैसा का वैसा कर देने वाली औषधि।  इसे कई सारी बीमारियो एवम रोगों में औषधि की तरह प्रयोग किया जाता है, किन्तु मुख्यतः, धातु रोग, मासिक धर्म के असंतुलन, रक्ताल्पता, कमजोरी तथा शरीर में हार्मोनल imbalance को ठीक करने के लिए यह सबसे भरोसे मंद औषधि है। लिवर और किडनी रोगों के लिये यह सबसे...

अडूसा, वासा, रूस के उपयोग

रूस, अडूसा या वासा के आयुर्वेदिक उपयोग और तरीका जानिए - #आयुर्वेद में अडूसा को आमतौर पर वासा के नाम से जाना जाता है, यह एक लोकप्रिय #औषधीय पौधा है। इस पौधे के सभी भागों (#पत्तियाँ, #फूल, #जड़, #तना, #फल) में औषधीय गुण होते हैं। इसकी एक खास गंध और #कड़वा स्वाद होता है। अडूसा पाउडर को #शहद के साथ सेवन करना  #काली_खांसी, #ब्रोंकाइटिस, #अस्थमा जैसे #श्वसन #संक्रमण के मामलों में फायदेमंद माना जाता है क्योंकि यह अपने #कफ को बाहर निकालने वाले गुण के कारण #वायुमार्ग से #बलगम के स्राव को बढ़ावा देने में मदद करता है। अडूसा (#वासाका) अपने #एंटीऑक्सीडेंट और #एंटी_इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण #गठिया के लक्षणों को प्रबंधित करने में भी मदद कर सकता है। यह गठिया और गाउट से जुड़े #जोड़ों_के_दर्द और #सूजन को कम करता है। यह अपने #एंटीस्पास्मोडिक गुण के कारण ऐंठन को भी कम करता है। अडूसा #त्वचा की समस्याओं के प्रबंधन के लिए एक प्रभावी घरेलू उपाय है। त्वचा पर ताजे अडूसा के पत्तों का #पेस्ट लगाने से इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण के कारण प्रभावित क्षेत्र में #दर्द और #सूजन को कम करके फोड़े और अल्सर को ठीक करने मे...

बथुआ का उपयोग

 बथुआ साग नहीं एक औषधि है 🌿🍀🥬 सागों का सरदार है बथुआ, सबसे अच्छा आहार है बथुआ। बथुआ अंग्रेजी में (Lamb's Quarters.) वैज्ञानिक नाम( Chenopodium album.) साग और रायता बना कर बथुआ अनादि काल से खाया जाता रहा है। लेकिन क्या आपको पता है कि विश्व की सबसे पुरानी महल बनाने की पुस्तक। शिल्प शास्त्र में लिखा है कि। हमारे बुजुर्ग अपने घरों को हरा रंग करने के लिए। पलस्तर में बथुआ मिलाते थे। हमारी बुजुर्ग महिलायें सिर से ढेरे व फांस (डैंड्रफ) साफ करने के लिए। बथुए के पानी से बाल धोया करती थीं। बथुआ गुणों की खान है और भारत में ऐसी ऐसी जड़ी बूटियां हैं। तभी तो हमारा भारत महान है। बथुए में क्या-क्या है ?? मतलब कौन-कौन से विटामिन और मिनरल्स हैं ?? तो सुने, बथुए में क्या नहीं है?? बथुआ विटामिन B1, B2, B3, B5, B6, B9 और C से भरपूर है। तथा बथुए में कैल्शियम, लोहा। मैग्नीशियम, मैगनीज, फास्फोरस। पोटाशियम, सोडियम व जिंक आदि मिनरल्स हैं। 100 ग्राम कच्चे बथुवे यानि पत्तों में 7.3 ग्राम कार्बोहाइड्रेट। 4.2 ग्राम प्रोटीन व 4 ग्राम पोषक रेशे होते हैं। कुल मिलाकर 43 Kcal होती है। जब बथुआ शीत (मट्ठा, लस्सी) या ...

सहजन या मोरिन्गा

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  संतरे से 7 गुना, दूध से 17 गुना, केले से 15 गुना और पालक से 25 गुना ज़्यादा ताकतवर हैं सहजन (मोरिन्गा) की पत्तियां, बस जान लें खाने का सही तरीका क्या है और फल की सब्जी तो सभी खाते हैं। Moringa Leaves Benefits: When And How To Eat : आजकल की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में जब हमें ठीक से पोषण नहीं मिल पाता, तब ये मोरिंगा की पत्तियाँ किसी वरदान से कम नहीं हैं. Written by: अनिता शर्मा फूड नवंबर 19, 2025 10:48 am IST Read Time: 6 mins मोरिंगा खाने का सही समय और तरीका | Moringa Leaves Benefits: When And How To Eat | Sahjan ke Patte Khane ke Fayde  Moringa Leaves Benefits: When And How To Eat : सहजन का नाम सुना है? हाँ, वही, जिसकी लंबी-लंबी फलियाँ होती हैं! इसे हम मोरिंगा (Moringa) भी कहते हैं. आयुर्वेद में तो इसे 'चमत्कारी पेड़' का दर्जा मिला हुआ है. हम में से ज़्यादातर लोग इसकी फलियाँ तो खा लेते हैं, पर इसकी पत्तियाँ... अरे भाई, यही तो असली सुपरफ़ूड हैं! आजकल की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में जब हमें ठीक से पोषण नहीं मिल पाता, तब ये मोरिंगा की पत्तियाँ किसी वरदान से कम नहीं हैं. ये तो हम...