सकारात्मक सोच

सकारात्मक सोच


एक बार एक केकड़ा समुद्र किनारे अपनी मस्ती में चला जा रहा था और बीच-बीच में रुक रुक कर अपने पैरों के निशान देखकर खुश होता, आगे बढ़ता और पैरों के निशान देखता उससे बनी  डिजाइन देख कर और खुश होता, इतने में एक लहर आई और उसके पैरों के सब निशान मिट गये। इस पर केकड़े को बड़ा गुस्सा आया, उसने लहर से बोला ऐ लहर मैं तो तुझे अपना मित्र मानता था, पर ये तूने क्या किया, मेरे बनाये सुंदर पैरों के निशानों को ही मिटा दिया कैसी दोस्त हो तुम । तब लहर बोली वो देखो पीछे से मछुआरे लोग पैरों के निशान देखकर ही तो केकड़ों को पकड़ रहे हैं, हे मित्र तुमको वो  पकड़ न लें, बस इसीलिये मैंने निशान मिटा दिये हैं।
   
सच यही है कई बार हम गुरुजनों की और माता-पिता की बातों को समझ नहीं पाते हैं और अपनी सोच अनुसार उसे गलत समझ लेते हैं, जबकि हर सिक्के के दो पहलू होते हैं ! अतः मन में बैर लाने से बेहतर है कि हम सोच समझकर निष्कर्ष निकाले...
HARISH CHANDRA RAJPUT 
DTHT buildcon pvt.ltd at Super corridor Indore mp 
🌹Jay Shree Ram🌹

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