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अनन्त ऊर्जा का भण्डार

 नोट:- आपने अपने सोचने का नियम समझ लिया तो आपकी जिन्दगी का आप कायाकल्प कर सकते हैं... इस दुनिया में आप सबसे शक्तिशाली काम कौन सा कर सकते हैं ? जवाब है खुद से प्रेम करना। प्रेम करने से हर चीज खूबसूरती से होने लगती है। खुद की इज्जत करना, प्रशंसा करना बेहद जरूरी है। छोटे बच्चे जानते हैं कि उन्हें खुद से प्रेम कैसे करना है। आप सभी जब पैदा हुए थे, तो प्रेम और उल्लास से भरे हुए थे। ऐसा एक भी बच्चा बतायें जो खुद से नफरत करता हो। वे अपनी भावनायें खुलकर बताते हैं। जब बच्चा खुश होता है तो आपको पता चलता है और जब वह गुस्सा होता है तो पडोसियों तक को पता चल जाता है, क्योंकि वे छुपाना नहीं जानते। वे साहस से भरे होते हैं। याद करें, आप भी कभी ऐसे ही साहसी हुआ करते थे, मोहब्बत से भरे हुए।  जीवन में एक और चीज बडा असर डालती है- आपके विचार और शब्द। आप जो सोचते और कहते हैं, वह इस ब्रह्मांड मे घूमता रहता है। और फिर कई गुना होकर आप तक वापस आता है। मानो ये दुनिया आपकी हर बात सुन रही हो और फिर लौटा रही हो। अब जरा सोचिए कि आप अधिकांश मौकों पर नकारात्मक विचार ही करते हैं, ऐसे मे आप तक क्या लौटकर आएगा? सो...

अचछे संस्कार/सुखी परिवार

 ,,,,,सभी ,भाई, बहनों को नमस्कार ,,,,,,,,,********भोजन के प्रकार******   भीष्म पितामह ने   गीता में अर्जुन को 4 प्रकार से भोजन ना करने के लिए  बताया था।   👉🏿1) पहला भोजन- जिस भोजन की थाली को कोई लांघ कर गया हो वह भोजन की थाली नाले में पड़े कीचड़ के समान होती है। 👉🏿2) दूसरा भोजन- जिस भोजन की थाली में ठोकर लग गई ,पाव लग गया वह भोजन की थाली भिष्टा के समान होता है। 👉🏿3) तीसरे प्रकार का भोजन -जिस भोजन की थाली में बाल पड़ा हो, केश पड़ा हो वह दरिद्रता के समान होता है। 👉🏿4) चौथे नंबर का भोजन -अगर पति और पत्नी एक ही थाली में भोजन कर रहे हो तो वह मदिरा के तुल्य होता है। विषेश सूचना --  और सुन अर्जुन-  बेटी अगर कुवारी हो और अपने पिता के साथ भोजन करती है एक ही थाली में ,, उस पिता की कभी अकाल मृत्यु नहीं होती ,क्योंकि बेटी पिता की अकाल मृत्यु को हर लेती है ।इसीलिए बेटी जब तक कुमारी रहे तो अपने पिता के साथ बैठकर भोजन करें। क्योंकि वह अपने पिता की अकाल मृत्यु को हर लेती हैं।  स्नान कब ओर केसे करे घर की समृद्धि बढाना हमारे हाथमे है सुबह के स्नान को ध...

भूमि की माप

20 बिस्वांसी    = 1 बिस्वा  20 बिस्वा        = 1 बीघा  1    बीघा        = 1936 व.ग. ढाई बीघा        = 1 एकड  सवा छह बीघा = 1 हैक्टर 

तुलसी पेड , तुलसी का पौधा

तुलसी का पौध लगाने संबंधित जानकारी- इस पेड को कहाँ लगायें और इस पेड के लगाने से क्या फायदे है और इस पेड को लगाने के बाद देखभाल और सावधानी क्या-क्या रखें... हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को बहुत ही शुभ माना गया है. इसे मां लक्ष्‍मी का अंश माना जाता है. धर्म, ज्‍योतिष के अलावा वास्‍तु शास्‍त्र (Vastu Shastra) में भी तुलसी को बहुत महत्‍व दिया गया है. जिस घर में तुलसी रहती है और रोज उसकी पूजा की जाती है, वहां हमेशा सुख-समृद्धि बनी रहती है. इसके अलावा तुलसी का पौधा वातावरण में सकारात्‍मकता भी लाता है. इसलिए हर घर में सही जगह पर तुलसी का पौधा लगाने की सलाह दी जाती है.  जरूर पालन करें ये नियम - @ तुलसी का पौधा लगाने पर इससे जुड़े कुछ नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है. जैसे - तुलसी के पौधे को कभी भी गंदे हाथों से नहीं छूना चाहिए, ना ही जूते-चप्‍पल पहनकर तुलसी को छूना चाहिए. तुलसी का पौधा बहुत पवित्र होता है, उसे हमेशा नहा-धोकर छूना चाहिए. इसके अलावा तुलसी के पौधे में कभी भी रविवार और एकादशी को जल न चढ़ाएं. इस दिन तुलसी जी भगवान विष्‍णु के लिए व्रत रखती हैं और जल चढ़ाने से व्रत टूट जाता है. ...

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स्पेशल दर्द निवारक तेल

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