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कृतज्ञता का राज

*कृतज्ञता*  आपके भीतर जो भी भावनाएं होती हैं,वही आपके आने वाले कल को आकृष्ट कर रहीं हैं। चिंता अधिक चिंता को खींचती है। तनाव अधिक तनाव को खींचता है। दुख अधिक दुख को आकृष्ट करता है। असंतोष अधिक असंतोष को आकृष्ट करता है।  और प्रसन्नता...   प्रसन्नता अधिक प्रसन्नता को लुभाती है। आनंद अधिक आनंद को आकर्षित करता है। शांति अधिक शांति को आकर्षित करती है। कृतज्ञता अधिक कृतज्ञता को आकर्षित करती है। दयालुता अधिक दयालुता को आकर्षित करती है। प्रेम अधिक प्रेम को आकर्षित करता है। आपका काम अंदरुनी है। अपने संसार को बदलने के लिए आपको बस इतना ही करना है, कि अपने अंदर के अहसास को बदल लें। यह कितना आसान है ! नोट- सुखमय और खुशहाल जीवन के लिए जिन्दगी मे हमेशा कृतज्ञ रहें आपका जीवन खुशियों से भरपूर रहेगा... HAVE A GOOD DAY ALL MEMBERS... Regards SARVOHITAAYE  HARISH CHANDRA RAJPUT 8109532175 

SARVOHITAAYE

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MEDITATION/मेडिटेशन

जैसा कि आपने “The Secret of Life in Hindi – जीवन का रहस्य” में पढा है कि हर मनुष्य के अन्दर एक शांत मनुष्य रहता है जिसे हम अंतरात्मा कहते है| हमारी अंतरात्मा हमेशा सही होती है और इसीलिए शायद यह कहा जाता है कि हम ईश्वर का अंश है| सभी महान लोगों ने यह स्वीकार किया है कि अंतरात्मा की आवाज (Inner Voice) ईश्वर की आवाज है और यह बात किसी धर्म विशेष से सम्बंधित नहीं है|   खुश रहने का सीधा सा तरीका यह होता है कि हम अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनें क्योंकि हमारी अंतरात्मा हमेशा हर परिस्थिति में सही होती है   हम जब कभी भी कुछ बुरा कर रहे होते है तो हमें कुछ अजीब सा लगता है मानो कोई हमें यह कह रहा हो कि वह बुरा काम मत करो| यह हमारी अंतरात्मा होती है जो हमें कुछ बुरा करने या किसी को दुःख पहुँचाने से रोकती है| और जब हम अपनी अंतरात्मा की आवाज को अनसुना कर देते है तो हमारा अपनी अंतरात्मा से संपर्क कमजोर हो जाता है|   जब हम दूसरी बार कुछ बुरा करने जा रहे होते है तो हमें अपनी अंतरात्मा की आवाज फिर महसूस होती है लेकिन इस बार वह आवाज इतनी मजबूत नहीं होती क्योंकि हमारा अपनी अंतरात्...

अनन्त ऊर्जा आपके अंदर भरी पडी है

क्या आप जानते हैं आपके ही अन्दर जादुई शक्ति है। अर्थात आपकी हर समस्या का समाधान आपके अवचेतन मन के पास उपलब्ध है।  आपका अवचेतन मन सकारात्मक और नकारात्मक दोनो दिशाओं मे काम करता है। यह अच्छे और बुरे मे फर्क नहीं करता। यह उन विचारों को पोषित करता रहता है जो आप इसमे डालते हैं। आप इसमे नकारात्मक विचार डालेंगे तो यह आपको असफलता, तनाव और दुख देगा।      अगर आप इसे अच्छे सकारात्मक विचार देंगे तो आपको खुशी, सफलता और समृद्धि देगा। अवचेतन मन चीजें देखता है और उन्हें दर्ज कर लेता है और फिर जब इनकी जरूरत होती है तो इन्हे याद कर इस्तेमाल कर लेता है। जो बात आप बौद्धिक स्तर पर स्वीकार करते हैं, मानते हैं वो आपके अवचेतन मन में भी स्वीकार्य होती है। इसलिए आपको अपने साथ होने वाली नकारात्मक घटनाओं और बातों पर ज्यादा चकित नहीं होना चाहिए, क्योंकि इन बातों को आपने ही अपने अवचेतन मन मे डाला है। हालांकि आप अवचेतन मन को प्रशिक्षित कर सकते हैं। आपकी सभी समस्याओं का समाधान अवचेतन मन के पास उपलब्ध है। अगर कोई समस्या है तो अपने अवचेतन मन से बात कीजिए। उसके सामने एक सवाल रख दीजिए। हो सकता है उस सव...

अनन्त ऊर्जा का भण्डार

 नोट:- आपने अपने सोचने का नियम समझ लिया तो आपकी जिन्दगी का आप कायाकल्प कर सकते हैं... इस दुनिया में आप सबसे शक्तिशाली काम कौन सा कर सकते हैं ? जवाब है खुद से प्रेम करना। प्रेम करने से हर चीज खूबसूरती से होने लगती है। खुद की इज्जत करना, प्रशंसा करना बेहद जरूरी है। छोटे बच्चे जानते हैं कि उन्हें खुद से प्रेम कैसे करना है। आप सभी जब पैदा हुए थे, तो प्रेम और उल्लास से भरे हुए थे। ऐसा एक भी बच्चा बतायें जो खुद से नफरत करता हो। वे अपनी भावनायें खुलकर बताते हैं। जब बच्चा खुश होता है तो आपको पता चलता है और जब वह गुस्सा होता है तो पडोसियों तक को पता चल जाता है, क्योंकि वे छुपाना नहीं जानते। वे साहस से भरे होते हैं। याद करें, आप भी कभी ऐसे ही साहसी हुआ करते थे, मोहब्बत से भरे हुए।  जीवन में एक और चीज बडा असर डालती है- आपके विचार और शब्द। आप जो सोचते और कहते हैं, वह इस ब्रह्मांड मे घूमता रहता है। और फिर कई गुना होकर आप तक वापस आता है। मानो ये दुनिया आपकी हर बात सुन रही हो और फिर लौटा रही हो। अब जरा सोचिए कि आप अधिकांश मौकों पर नकारात्मक विचार ही करते हैं, ऐसे मे आप तक क्या लौटकर आएगा? सो...

अचछे संस्कार/सुखी परिवार

 ,,,,,सभी ,भाई, बहनों को नमस्कार ,,,,,,,,,********भोजन के प्रकार******   भीष्म पितामह ने   गीता में अर्जुन को 4 प्रकार से भोजन ना करने के लिए  बताया था।   👉🏿1) पहला भोजन- जिस भोजन की थाली को कोई लांघ कर गया हो वह भोजन की थाली नाले में पड़े कीचड़ के समान होती है। 👉🏿2) दूसरा भोजन- जिस भोजन की थाली में ठोकर लग गई ,पाव लग गया वह भोजन की थाली भिष्टा के समान होता है। 👉🏿3) तीसरे प्रकार का भोजन -जिस भोजन की थाली में बाल पड़ा हो, केश पड़ा हो वह दरिद्रता के समान होता है। 👉🏿4) चौथे नंबर का भोजन -अगर पति और पत्नी एक ही थाली में भोजन कर रहे हो तो वह मदिरा के तुल्य होता है। विषेश सूचना --  और सुन अर्जुन-  बेटी अगर कुवारी हो और अपने पिता के साथ भोजन करती है एक ही थाली में ,, उस पिता की कभी अकाल मृत्यु नहीं होती ,क्योंकि बेटी पिता की अकाल मृत्यु को हर लेती है ।इसीलिए बेटी जब तक कुमारी रहे तो अपने पिता के साथ बैठकर भोजन करें। क्योंकि वह अपने पिता की अकाल मृत्यु को हर लेती हैं।  स्नान कब ओर केसे करे घर की समृद्धि बढाना हमारे हाथमे है सुबह के स्नान को ध...

भूमि की माप

20 बिस्वांसी    = 1 बिस्वा  20 बिस्वा        = 1 बीघा  1    बीघा        = 1936 व.ग. ढाई बीघा        = 1 एकड  सवा छह बीघा = 1 हैक्टर