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अचीवर कैसे बनें

 *TBA* टी बी ए सफलता का फार्मूला है T- THINK B- BELIEVE  A- ACHIEVE  THINK- थिंक= सोचिए कुछ अच्छा करने का प्लान बनायें BELIEVE- बिलीव= विश्वास कीजिए कि मैं इसे करके (पाकर) ही रहूंगा ACHIEVE- अचीव= प्राप्त कीजिए आप सब कुछ प्राप्त कर सकते हैं... इस संसार में अच्छी सोच और विश्वास के साथ की गई सही मेहनत से सब कुछ प्राप्त किया जा सकता है ईश्वर हम सब की सहायता करें क्योंकि ईश्वर के बिना कुछ भी नहीं...

जिसने मन को जीता उसने जीत लिया जग

"चेंज योर हैविट, चेंज योर लाईफ" यह बात 100 प्रतिशत सही है कि आप अपनी आदतें बदल लीजिए तो आपकी जिन्दगी पूरी बदल जायेगी। आपको अपनी जिन्दगी बदलना है तो- आपको नियमित सुबह जल्दी उठना होगा, नियमित पठन-पाठन करना होगा, नियमित व्यायाम करना होगा और वक्त को बर्बाद करने वाली चीजों के आकर्षण से दूर रहना होगा।भगवान श्रीकृष्ण ने भी यही राह दिखाई है।             सफलता के लिए लग जायें कटिबद्ध हों नियमित अभ्यास करें, मन से हर दिन लडने के लिए तैयार हो जायें स्वयं से कठोर होने के लिए तैयार हो जायें सफलता स्वागत के लिए प्रतीक्षा करेगी... युद्ध  युद्ध शब्द कानों मे पडते ही मन-मस्तिष्क में अलग-अलग प्रकार के दृश्य घूमने लगते हैं। पर एक ऐसा युद्ध भी है, जो अविरत जारी रहता है- ये हमारे अपने ही भीतर मन के साथ होने वाला घनघोर युद्ध है।            पृथ्वी पर हर व्यक्ति जो जन्म लेता है किसी न किसी अरमान या चाहत के साथ जीवन की यात्रा का श्रीगणेश करता है। सपने होते हैं, उमंग-उत्साह का जोर भी होता है। बुद्धि, शक्ति और उल्लास का प्रचंड प्रवाह भी होता है, लेक...

कामयाब होना एक अच्छी आदत है...

@द अचीवमेंट हैविट@ कामयाब होना एक अच्छी आदत है क्यों लोकप्रिय हुई उसकी लोकप्रियता का राज उसके उपशीर्षक में छिपा है। पाठकों को इन पंक्तयों ने आकृष्ट किया था कि "दिन मे सपने देखना बंद करें" और कुछ करें और अपने जीवन की बागडोर खुद संभालें। 1- अचीवर बनने की कला क्या कारण है कि कुछ लोग अपने काम अच्छी तरह से पूरे करके अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में बहुत सफल रहते हैं ? इसकी क्या तकनीक है ?  क्या वे एलियंस हैं ? या वे जन्मजात अचीवर्स होते हैं ? नहीं उन्होंने एक चीज विकसित कर ली है, जिसे "अचीवमेंट हैविट" कहते हैं। एक बार आप इसे पा लेंगे तो आप भी *अचीवर* बन सकते हैं... 2- आदतें बदलें और अचीवर(सफल) बनें समस्या हमारी एप्रोच में है । हम एक ही गलती को बार-बार दोहराते रहते हैं। गलतियाँ करना भी एक आदत है। जब आप इस आदत को बदलकर अचीव करने की आदत डाल लेते हैं तो आपका जीवन बदल जाता है और आप अचीवर बनने की पहली सीढी पार कर लेते हैं। जब आप पहली बार किसी चीज को अचीव करते हैं तो उसे बार-बार सफलतापूर्वक करने की आपकी क्षमतायें और बढ जाती हैं। 3- चाहने और करने मे अंतर पहली अचीवमेंट हैविट है,...

राम नाम शब्द की महिमा

1️⃣1️⃣❗1️⃣1️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣3️⃣ "राम" शब्द में दो अर्थ व्यंजित हैं। सुखद होना और ठहर जाना जैसे अपने मार्ग से भटका हुआ कोई क्लांत पथिक किसी सुरम्य स्थान को देखकर ठहर जाता है। हमने सुखद ठहराव का अर्थ देने वाले जितने भी शब्द गढ़े, सभी में "राम" अंतर्निहित है, यथा आराम, विराम, विश्राम, अभिराम, उपराम, ग्राम जो रमने के लिए विवश कर दे, वह "राम" जीवन की आपाधापी में पड़ा अशांत मन, जिस आनंददायक गंतव्य की सतत तलाश में है, वह गंतव्य है "राम" भारतीय मन हर स्थिति में "राम"को साक्षी बनाने का आदी है।  दुःख में  "हे राम" पीड़ा में  "अरे राम"  लज्जा में  "हाय राम" अशुभ में  "अरे राम राम"  अभिवादन में  "राम राम"  शपथ में  "राम दुहाई" अज्ञानता में  "राम जाने" अनिश्चितता में  "राम भरोसे"  अचूकता के लिए "रामबाण"  मृत्यु के लिए  "रामनाम सत्य" सुशासन के लिए "रामराज्य" जैसी अभिव्यक्तियां पग-पग पर "राम" को साथ खड़ा करतीं हैं। "राम" भी इतने...

मैनेजमेंट के गुण श्री हनुमान चालीसा मे

 श्रीहनुमान चालीसा में छिपे मैनेजमेंट के सूत्र... इसका जाप बहुत ही अद्भुत और चमत्कारिक है कई लोगों की दिनचर्या श्री हनुमान चालीसा पढ़ने से शुरू होती है। पर क्या आप जानते हैं कि श्री हनुमान चालीसा में 40 चौपाइयां हैं, ये उस क्रम में लिखी गई हैं जो एक आम आदमी की जिंदगी का क्रम होता है। माना जाता है कि श्री तुलसीदास जी ने चालीसा की रचना मानस से पूर्व किया था श्री हनुमान जी को गुरु बनाकर उन्होंने श्रीराम जी को पाने की शुरुआत की। अगर आप सिर्फ श्री हनुमान चालीसा पढ़ रहे हैं तो यह आपको भीतरी शक्ति तो दे रही है लेकिन अगर आप इसके अर्थ में छिपे जिंदगी के सूत्र समझ लें तो आपको जीवन के हर क्षेत्र में सफलता दिला सकते हैं। श्रीहनुमान चालीसा सनातन परंपरा में लिखी गई पहली चालीसा है शेष सभी चालीसाएं इसके बाद ही लिखी गई। श्रीहनुमान चालीसा की शुरुआत से अंत तक सफलता के कई सूत्र हैं। आइए जानते हैं श्रीहनुमान चालीसा से आप अपने जीवन में क्या-क्या बदलाव ला सकते हैं…. शुरुआत गुरु से… श्रीहनुमान चालीसा की शुरुआत गुरु से हुई है… श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। अर्थ - अपने गुरु के चरणों की धूल से...

पैसों की बारिश (बरकत) करने वाला पेड।

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इस पौधे को घर पर रखने से होती है पैसों की बरसात, चुंबक की तरह पैसा खींचता है यह पेड। जब बहुत मेहनत करने पर भी सफलता, कामयाबी न मिले तो रास्ता बंद नहीं हो जाता आपके लिए एक जादुई प्लांट पेड है जो आपको अपार सफलताएं, खुशियां देगा सिर्फ एक बार जरूर लगायें ये पेड अपने घर या व्यवसाय स्थान पर। भारतीय वास्तु शास्त्र में वैसे तो पेड़ पौधे का काफी महत्व है लेकिन वास्तुशास्त्र फेंगशुई का भी काफी महत्व होता है। चीनी वास्तु शास्त्र फेंगशुई में भी घर में पैसों और तरक्की पाने के कई उपाय बताए जाते हैं। वैसे तो इस बात को हर कोई जानता है कि मनी प्लांट को घर में लगाना काफी शुभ माना जाता है। आज हम आपको एक ऐसे पौधे के बारे में बताने जा रहे हैं जो सच में पैसे खींचने का ही काम करता है। इसे मोहिनी पौधा भी कहते हैं और इसे लगाने वाले घर में बहुत तेजी से धन और संपत्ति आती है।  इस पौधा को घर मे लगाने से समस्त परिवार मे आपसी मन-मुटाव दूर होता है और प्रेम उत्पन्न होता है जिससे घर मे सुख-शांति बढती है। vastu घर-घर में लग रहा मोहिनी पौधा शहर में अधिकतर लोग धन और संपत्ति की कामना में मोहिनी पौधे को लगा रहे हैं। मान...

रामायण की कुछ विशेष जानकारी

 रामायण में वर्णित मुख्य स्थान :: 1.तमसा नदी : अयोध्या से 20 किमी दूर है तमसा नदी। यहां पर उन्होंने नाव से नदी पार की।   2.श्रृंगवेरपुर तीर्थ : प्रयागराज से 20-22 किलोमीटर दूर वे श्रृंगवेरपुर पहुंचे, जो निषादराज गुह का राज्य था। यहीं पर गंगा के तट पर उन्होंने केवट से गंगा पार करने को कहा था। श्रृंगवेरपुर को वर्तमान में सिंगरौर कहा जाता है।   3.कुरई गांव : सिंगरौर में गंगा पार कर श्रीराम कुरई में रुके थे।   4.प्रयाग: कुरई से आगे चलकर श्रीराम अपने भाई लक्ष्मण और पत्नी सहित प्रयाग पहुंचे थे। कुछ महीने पहले तक प्रयाग को इलाहाबाद कहा जाता था ।   5.चित्रकूट : प्रभु श्रीराम ने प्रयाग संगम के समीप यमुना नदी को पार किया और फिर पहुंच गए चित्रकूट। चित्रकूट वह स्थान है, जहां राम को मनाने के लिए भरत अपनी सेना के साथ पहुंचते हैं। तब जब दशरथ का देहांत हो जाता है। भारत यहां से राम की चरण पादुका ले जाकर उनकी चरण पादुका रखकर राज्य करते हैं।   6.सतना: चित्रकूट के पास ही सतना (मध्यप्रदेश) स्थित अत्रि ऋषि का आश्रम था। हालांकि अनुसूइया पति महर्षि अत्रि चित्रकूट के तपोवन में रहा ...