सहनशील कैसे बनें और सहनशील बनने के फायदे।

 सहनशीलता के सूत्र | शिव बाबा के ज्ञान पर आधारित प्रेरणादायक लेख

ॐ शान्ति

शिव बाबा परमपिता परमात्मा का ज्ञान

सहनशीलता क्या है?

सहनशीलता केवल दुःख सहने का नाम नहीं है, बल्कि हर परिस्थिति में मन की शान्ति, धैर्य, प्रेम और क्षमा बनाए रखने की श्रेष्ठ शक्ति है। जब मनुष्य सहनशील बनता है, तब वह परिस्थितियों का दास नहीं, बल्कि उनका विजेता बन जाता है।


सहनशीलता के 8 श्रेष्ठ सूत्र @

1) रहमभाव :- 

परमपिता परमात्मा शिव बाबा की तरह, यदि हम रहम भाव से भरपूर होंगे तो हर आत्मा की गलतियों पर भी रहम भाव रहेगा और सहनशील बनेंगे।

2) मातृवत स्नेह :-

अपने को जगत अम्बा समझें और स्नेह का सागर बनकर रहें। सोचें, माँ अनेक गलतियां करने पर भी अपने बच्चे के प्रति शुभ भावना, शुभकामना रखती है, क्या ऐसे ही मैं भी हूँ?

3) हिसाब-किताब चुकता :-

अनेक आत्माओं से जन्म-जन्मांतर के कर्मों के हिसाब-किताब हैं इसलिए कभी कोई दुःख दे तो दुखी न होकर ऐसा समझें कि हिसाब-किताब चुकता हो रहा है।

4) सहनशाह बनने की तैयारी :-

भगवान ने कहा है, यदि सहन करेंगे तो शहंशाह बनेंगे, जितना अधिक सहन करेंगे, उतने बड़े शहंशाह बनेंगे, इसलिए खुशी-खुशी सहन करें।

5) प्रभु-प्रेम की निशानी :-

सहन करना प्रभु-प्रेम की निशानी है। हम उसके प्यार में सहन करते रहें, क्योंकि भगवान ने आज्ञा दी है, कि निन्दा-स्तुति, मान-अपमान, हार-जीत सबमें समान रहना है।

6) निश्चित पार्ट की स्मृति :-

सदैव स्मृति रखें कि यह सृष्टि एक नाटकशाला है। इसमें प्रत्येक आत्मा का अपना-अपना निश्चित पार्ट है। नाटक में अच्छे और बुरे पार्ट भी होते हैं। इसमें पार्ट धारी का कोई दोष नहीं। इसलिए कभी भी दूसरों के पार्ट को देखकर बुरा महसूस नहीं करना है। ध्यान रखें कि मेरा पार्ट सबसे अच्छा है।

7) अपकारी पर उपकार :-

अपने जीवन में ऐसी घटनाओं की सूची तैयार करें, जब हमने बुरा करने वाले का भी भला किया हो तथा उसके बुरे को, संकल्प तक भी महसूस न किया हो और क्षमा कर दिया हो।

8) राजयोग का अभ्यास :-

जितना-जितना हम स्वयं को आत्मा समझकर प्रेम के सागर परमपिता परमात्मा शिव ज्योतिबिन्दु के प्रेम में डूब जायेंगे हम उतना स्वयं ही सहनशील बन जायेंगे।


 सहनशीलता के प्रेरणादायक उदाहरण

1. ईसा मसीह जी को सूली पर चढ़ा दिया गया।

2. साईं बाबा जी ने बहुत अपमान सहन किया।

3. भक्तिन मीराबाई जी ने प्रभु प्रेम में ज़हर का प्याला पिया।

4. स्वामी दयानन्द जी ने ज़हर देने व्यक्ति को क्षमा कर दिया।

5. गुरु गोविन्द सिंह जी के दो छोटे-छोटे बच्चे हँसते-हँसते दीवारों में चिनवा दिए गए।


निष्कर्ष

सहनशीलता कमजोरी नहीं, बल्कि आत्मबल की सबसे बड़ी पहचान है। जो व्यक्ति रहमभाव, क्षमा, प्रेम, राजयोग और ईश्वर की स्मृति में रहता है, वह जीवन की कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अडिग रहता है। सहनशीलता ही सच्ची विजय, शान्ति और आध्यात्मिक उन्नति का आधार है।


ॐ शान्ति। जय शिव। 

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