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सहनशील कैसे बनें और सहनशील बनने के फायदे।

 सहनशीलता के सूत्र | शिव बाबा के ज्ञान पर आधारित प्रेरणादायक लेख ॐ शान्ति शिव बाबा परमपिता परमात्मा का ज्ञान सहनशीलता क्या है? सहनशीलता केवल दुःख सहने का नाम नहीं है, बल्कि हर परिस्थिति में मन की शान्ति, धैर्य, प्रेम और क्षमा बनाए रखने की श्रेष्ठ शक्ति है। जब मनुष्य सहनशील बनता है, तब वह परिस्थितियों का दास नहीं, बल्कि उनका विजेता बन जाता है। सहनशीलता के 8 श्रेष्ठ सूत्र @ 1) रहमभाव :-  परमपिता परमात्मा शिव बाबा की तरह, यदि हम रहम भाव से भरपूर होंगे तो हर आत्मा की गलतियों पर भी रहम भाव रहेगा और सहनशील बनेंगे। 2) मातृवत स्नेह :- अपने को जगत अम्बा समझें और स्नेह का सागर बनकर रहें। सोचें, माँ अनेक गलतियां करने पर भी अपने बच्चे के प्रति शुभ भावना, शुभकामना रखती है, क्या ऐसे ही मैं भी हूँ? 3) हिसाब-किताब चुकता :- अनेक आत्माओं से जन्म-जन्मांतर के कर्मों के हिसाब-किताब हैं इसलिए कभी कोई दुःख दे तो दुखी न होकर ऐसा समझें कि हिसाब-किताब चुकता हो रहा है। 4) सहनशाह बनने की तैयारी :- भगवान ने कहा है, यदि सहन करेंगे तो शहंशाह बनेंगे, जितना अधिक सहन करेंगे, उतने बड़े शहंशाह बनेंगे, इसलिए खुश...

आत्म सम्मोहन शक्ति और विधि

Sarvohitaaye vlogs पर आत्म सम्मोहन की शक्ति को जागृत करने के लिए स्टेप बाय स्टेप जानकारी दी गई है। सबसे पहले ध्यान से पढ़ें फिर उपयोग करें और अपने जीवन को स्वस्थ बनायें।  1. पहली स्टेप : ध्यान, प्राणायाम और नेत्र त्राटक द्वारा आत्म सम्मोहन की शक्ति को जगाया जा सकता है। आप पहले प्रतिदिन 5 मिनट का ध्यान करते वक्त अपने भृकुटी (माथे) पर दोनों आंखों के बीच में फोकस करें या आप चाहें तो दीवार पर एक बिंदु बनाकर उसे पाँच मिनट तक देखने के बाद आँखें बंद करके उस बिंदु को देखने का प्रयास करें। कुछ लोग अंगूठे को आँखों की सीध में रखकर तो, कुछ लोग स्पाइरल (सम्मोहन चक्र), कुछ लोग घड़ी के पेंडुलम को हिलते हुए, कुछ लोग लाल बल्ब को एकटक देखते हुए और कुछ लोग मोमबत्ती को एकटक देखते हुए भी उक्त साधना को करते हैं। 2. दूसरी स्टेप : अब शवासन की मुद्रा में लेटकर खुद के शरीर को पूर्णतः ढीला छोड़ दें और सिर्फ स्वांसों के आवागमन पर ही ध्यान दें। 3. तीसरी स्टेप : जब उपरोक्त का अभ्यास हो जाए तब उक्त अवस्था में ही खुद को निर्देश देना प्रारंभ करें। जैसे यदि आपमें आत्मविश्वास की कमी हो तो खुद से कहें कि मुझमें बहुत ...

घुटनों और जोड़ों के दर्द का इलाज

आजकल घूटनों में ग्रीस कम होने कि बिमारी 50+ के नर व नारी को बहुत हो रही है । इसके लिए दो तीन महीने की देशी दवाई जो पंसारी के पास मिल जाती है, इसके लिए- विजयसार कि लकङी 200 ग्राम, लगभग 50 रूपये के आसपास मिल जाऐगी ले आयें । सेवन विधि- पहले लकङी को अच्छे से धोकर धूप मे सुखा लेवें, फिर कूटकर जौ व गेंहू जितने छोटे-छोटे टुकङे कर लेवें। अब दस ग्राम लकङी को कांच मिट्टी या चीनी मिट्टी के एक गिलाश मे पानी भरकर दस ग्राम लकङी को रात को भिगो देवें । सुबह उठकर खाली पेट छानकर पी लेवे, फिर गिलाश पानी से भर देवें, शाम को सोते समय वैसे ही पानी पी लेवें, इस प्रकार तीन दिन एक बार की लकङी रखनी है, तीन दिन बाद लकङी बदल देवें । 15 से 20 दिन बाद घूटनो मे ग्रीस कम होने से होने वाले दर्द मे असर दिखाई देगा । और दूसरा उपाय भी साथ में कर सकते हैं - 200 ग्राम देसी बबूल कि कच्ची फली, छाया मे सुखाई हुई लें । 200 ग्राम मिश्री के साथ पीसकर पाऊडर बना लेवे । एक चम्मच सुबह एक चम्मच शाम को दूध के साथ सेवन करे ।  यह दोनो प्रयोग से 95%  तक घूटनों का दर्द, जिसमें डाक्टर ने ग्रीस कम या घुटनों का घिसना बताया हो ...

अति गुणकारी औषधि अतिबला

आइए जानते हैं आज एक अति गुणकारी औषधि अतिबला के बारे में. यह एक महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक औषधीय पौधा है। इसे आयुर्वेद में बलवर्धक और शरीर को पोषण देने वाली जड़ी-बूटी माना जाता है। अतिबला के पत्ते, जड़, बीज और तना सभी औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं। इसमें एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और पौष्टिक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए लाभकारी माने जाते हैं। सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह शरीर की कमजोरी और थकान को दूर करने में मदद करती है। इसे बलवर्धक औषधि माना जाता है, जो शरीर को ऊर्जा और ताकत प्रदान करती है। आयुर्वेद में इसका उपयोग कमजोरी और दुर्बलता दूर करने के लिए किया जाता है। यह जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द में भी लाभकारी मानी जाती है। अतिबला में सूजन-रोधी गुण होते हैं, जो शरीर के दर्द और सूजन को कम करने में मदद करते हैं। इसका तेल या लेप लगाने से आराम मिल सकता है। पाचन तंत्र के लिए भी फायदेमंद है। यह भूख बढ़ाने, अपच और कब्ज जैसी समस्याओं को कम करने में सहायक हो सकती है। यह पाचन क्रिया को संतुलित रखने में मदद करती है। यह इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में भी उपयोगी मानी जाती है। इसमें मौजूद एंटीऑ...

चिरचिटा, अपामार्ग के चमत्कारी उपाय

चिरचिटा इसे लचिचरा और अपामार्ग भी कहते है,,, अपामार्ग से बुद्धि, वाणी और व्यापार वृद्धि का प्राकृतिक उपाय । नमस्ते दोस्तों, आज मैं आपको एक ऐसे अद्भुत पौधे के बारे में बताने जा रहा हूँ जो हमारे आसपास ही रोड के किनारे सभी जगह पाया जाता है, लेकिन इसके गुणों से बहुत कम लोग वाकिफ हैं। यह है चिरचिटा, जिसे अपामार्ग भी कहते हैं। यह कोई साधारण पौधा नहीं है, यह प्रकृति का एक अनमोल उपहार है जो आपकी बुद्धि, वाणी और व्यापार में अद्भुत वृद्धि कर सकता है। यह उपाय रवि पुष्य योग में करना विशेष रूप से फलदायी होता है।  क्या है चिरचिटा ? चिरचिटा एक औषधीय पौधा है जो आमतौर पर खाली जगहों पर, सड़कों के किनारे या बंजर जमीन पर उगता है। इसे संस्कृत में अपामार्ग कहते हैं। आयुर्वेद में इसका बहुत महत्व है। इसकी पत्तियां, बीज और जड़ सभी औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं। आज हम बात करेंगे इसकी जड़ के बारे में। इसकी जड़ में वह शक्ति है जो आपको बुद्धि प्रदान कर सकती है, आपकी वाणी को तेज कर सकती है और आपके व्यापार में वृद्धि कर सकती है। बुद्ध के रत्न पन्ना का विकल्प,,,,, आपने पन्ना रत्न के बारे में सुना होगा जो बुद्धि ...

कोलेजन बूस्टर पाउडर बनाने का तरीका

 झुर्रियों और ढीली स्किन से परेशान ??? घर पर ही बनाएं देसी कोलेजन बूस्टर पाउडर, हफ्ते भर में कांच की तरह चमकेगा चेहरा! बढ़ती उम्र और डल स्किन से छुटकारा पाने के लिए अब महंगे सप्लीमेंट्स की जरूरत नहीं. आपके घर की रसोई में मौजूद कुछ सुपरफूड्स ही ग्लोइंग स्किन देने में मदद करते हैं. आप इन सुपरफूड्स की मदद से घर पर ही 'नेचुरल कोलेजन बूस्टिंग पाउडर' बना सकते हैं. Homemade Collagen Booster Powder:   फिटनेस और स्किन ट्रेंड आजकल सबसे ज्यादा सोशल मीडिया पर देखने को मिल रहे हैं, आज के दौर में हर दूसरा इंसान फिट बॉडी और चमकदार स्किन चाहता है. इसी वजह से सोशल मीडिया पर भी कई तरह की क्रीम और टोनर लोग प्रमोट करते रहते हैं और पार्लर जाकर भी लोग महंगे-महंगे फेशियल करवाते हैं. स्किन पर कुछ भी लगाने से पहले सबसे जरूरी है कि हमें अपनी स्किन के बारे में पता होना चाहिए. अगर आपकी स्किन ड्राई, बेजान और झुर्रियों से भरी है तो इस मतलब साफ है कि आपका कोलेजन लेवल कम है. कोलेजन हमारी बॉडी का जरूर तत्व है, जो कई तरीके से शरीर में काम करता है. त्वचा के लिए भी कोलेजन बहुत अहम रोल निभाता है, क्योंकि इसक...

कलौंजी Kalaunji

 "मौत को छोड कर हर मर्ज की दवाई है कलौंजी" कलयुग में धरती पर संजीवनी है कलौंजी, अनगिनत रोगों को चुटकियों में ठीक करती है।     कैसे करें इसका सेवन? वो इस पोस्ट के अंत में है🙏👇👇 पहले जान ले कि ये किन-किन रोगों में सहायक है? 1/. टाइप-2 डायबिटीज: प्रतिदिन 2 ग्राम कलौंजी के सेवन के परिणामस्वरूप तेज हो रहा ग्लूकोज कम होता है। इंसुलिन रैजिस्टैंस घटती है,बीटा सैल की कार्यप्रणाली में वृद्धि होती है तथा ग्लाइकोसिलेटिड हीमोग्लोबिन में कमी आती है। 2/. मिर्गी: 2007 में हुए एक अध्ययन के अनुसार मिर्गी से पीड़ित बच्चों में कलौंजी के सत्व का सेवन दौरे को कम करता है। 3/. उच्च रक्तचाप: 100 या 200 मि.ग्रा. कलौंजी के सत्व के दिन में दो बार सेवन से हाइपरटैंशन के मरीजों में ब्लड प्रैशर कम होता है। रक्तचाप (ब्लडप्रेशर) में एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में 2 बार पीने से रक्तचाप सामान्य बना रहता है। तथा 28 मि.ली. जैतुन का तेल और एक चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर पूर शरीर पर मालिश आधे घंटे तक धूप में रहने से रक्तचाप में लाभ मिलता है। यह क्रिया हर तीसरे दिन एक महीने तक करना च...