झुर्रियों और ढीली स्किन से परेशान ??? घर पर ही बनाएं देसी कोलेजन बूस्टर पाउडर, हफ्ते भर में कांच की तरह चमकेगा चेहरा! बढ़ती उम्र और डल स्किन से छुटकारा पाने के लिए अब महंगे सप्लीमेंट्स की जरूरत नहीं. आपके घर की रसोई में मौजूद कुछ सुपरफूड्स ही ग्लोइंग स्किन देने में मदद करते हैं. आप इन सुपरफूड्स की मदद से घर पर ही 'नेचुरल कोलेजन बूस्टिंग पाउडर' बना सकते हैं. Homemade Collagen Booster Powder: फिटनेस और स्किन ट्रेंड आजकल सबसे ज्यादा सोशल मीडिया पर देखने को मिल रहे हैं, आज के दौर में हर दूसरा इंसान फिट बॉडी और चमकदार स्किन चाहता है. इसी वजह से सोशल मीडिया पर भी कई तरह की क्रीम और टोनर लोग प्रमोट करते रहते हैं और पार्लर जाकर भी लोग महंगे-महंगे फेशियल करवाते हैं. स्किन पर कुछ भी लगाने से पहले सबसे जरूरी है कि हमें अपनी स्किन के बारे में पता होना चाहिए. अगर आपकी स्किन ड्राई, बेजान और झुर्रियों से भरी है तो इस मतलब साफ है कि आपका कोलेजन लेवल कम है. कोलेजन हमारी बॉडी का जरूर तत्व है, जो कई तरीके से शरीर में काम करता है. त्वचा के लिए भी कोलेजन बहुत अहम रोल निभाता है, क्योंकि इसक...
सहनशीलता के सूत्र | शिव बाबा के ज्ञान पर आधारित प्रेरणादायक लेख ॐ शान्ति शिव बाबा परमपिता परमात्मा का ज्ञान सहनशीलता क्या है? सहनशीलता केवल दुःख सहने का नाम नहीं है, बल्कि हर परिस्थिति में मन की शान्ति, धैर्य, प्रेम और क्षमा बनाए रखने की श्रेष्ठ शक्ति है। जब मनुष्य सहनशील बनता है, तब वह परिस्थितियों का दास नहीं, बल्कि उनका विजेता बन जाता है। सहनशीलता के 8 श्रेष्ठ सूत्र @ 1) रहमभाव :- परमपिता परमात्मा शिव बाबा की तरह, यदि हम रहम भाव से भरपूर होंगे तो हर आत्मा की गलतियों पर भी रहम भाव रहेगा और सहनशील बनेंगे। 2) मातृवत स्नेह :- अपने को जगत अम्बा समझें और स्नेह का सागर बनकर रहें। सोचें, माँ अनेक गलतियां करने पर भी अपने बच्चे के प्रति शुभ भावना, शुभकामना रखती है, क्या ऐसे ही मैं भी हूँ? 3) हिसाब-किताब चुकता :- अनेक आत्माओं से जन्म-जन्मांतर के कर्मों के हिसाब-किताब हैं इसलिए कभी कोई दुःख दे तो दुखी न होकर ऐसा समझें कि हिसाब-किताब चुकता हो रहा है। 4) सहनशाह बनने की तैयारी :- भगवान ने कहा है, यदि सहन करेंगे तो शहंशाह बनेंगे, जितना अधिक सहन करेंगे, उतने बड़े शहंशाह बनेंगे, इसलिए खुश...
कपालभाती प्राणायाम को कपालभाती क्यों कहते हैं और इस प्राणायाम को क्यों करना चाहिए जानिए - कपालभाति को कपालभाति इसलिए कहते हैं क्योंकि यह संस्कृत के दो शब्दों "कपाल" (मस्तिष्क/खोपड़ी) और "भाति" (चमकना/प्रकाश) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है "खोपड़ी को चमकाने वाली" या "मस्तिष्क को प्रकाशित करने वाली" श्वास तकनीक, जो इस अभ्यास से माथे पर चमक (तेज) और आंतरिक शुद्धि आती है, और यह मस्तिष्क के कार्यप्रणाली को बेहतर बनाती है। शाब्दिक अर्थ: कपाल (Kapal): सिर, ललाट या खोपड़ी। भाति (Bhati): चमकना, प्रकाशित करना, दीप्ति, तेज। नामकरण का कारण: मस्तिष्क की शुद्धि: इस क्रिया से मस्तिष्क और उसके नीचे के अंग (जैसे साइनस, नाक मार्ग) शुद्ध होते हैं, जिससे मानसिक स्पष्टता और एकाग्रता बढ़ती है। चेहरे पर चमक: अभ्यास के बाद माथे पर पसीना आता है और चेहरे पर एक प्राकृतिक चमक (ओज) आती है, जो आंतरिक सफाई का प्रतीक है। प्राणायाम का राजा: इसे प्राणायामों का राजा भी कहते हैं क्योंकि यह नाभि (मणिपुर चक्र) को सक्रिय करके मस्तिष्क तक ऊर्जा पहुंचाता है और तनाव कम करता है। संक्षे...
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